कवर्धा सरस मेला में दो दिन में 1.85 लाख का कारोबार, महिला समूहों के उत्पादों को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया

कवर्धा के सरदार पटेल मैदान में आयोजित सरस मेला में दो दिनों में ही 1.85 लाख रुपये से अधिक का कारोबार हुआ। महिला स्व सहायता समूहों के उत्पादों को लोगों ने खूब पसंद किया।

Mar 26, 2026 - 13:19
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कवर्धा सरस मेला में दो दिन में 1.85 लाख का कारोबार, महिला समूहों के उत्पादों को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा | कवर्धा में आयोजित संभागीय सरस मेला महिला स्व सहायता समूहों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है। सरदार पटेल मैदान में 23 मार्च से 26 मार्च तक आयोजित इस मेले में महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को लोगों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। महज दो दिनों के भीतर ही विभिन्न समूहों ने कुल मिलाकर 1 लाख 85 हजार रुपये से अधिक का व्यवसाय कर लिया है, जो इस आयोजन की सफलता को दर्शाता है।

इस मेले में दुर्ग संभाग के सातों जिलों से आए महिला स्व सहायता समूहों ने अपने-अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए स्टॉल लगाए हैं। इन स्टॉलों में जैविक खाद्य पदार्थों से लेकर घरेलू उपयोग की आकर्षक वस्तुएं तक उपलब्ध हैं। खास तौर पर दालों की विभिन्न किस्में, अचार, पापड़, मिलेट बिस्किट्स, हर्बल फिनायल, साबुन, दोना-पत्तल, अगरबत्ती, हैंडलूम उत्पाद, बिरनमाला, चूड़ी और कंगन जैसे सामान लोगों को काफी आकर्षित कर रहे हैं।

मेले की एक खास बात यह भी है कि यहां उपलब्ध अधिकांश उत्पाद बाजार मूल्य से कम दरों पर मिल रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में खरीदारी को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग मेला स्थल पहुंचकर न केवल इन उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के इस प्रयास की सराहना भी कर रहे हैं।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम, अभिषेक अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मेले में फूड स्टॉलों के अलावा 28 अन्य स्टॉल लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि मेले के शुरुआती दो दिनों में ही 1.85 लाख रुपये से अधिक की बिक्री हो चुकी है, जो महिला समूहों के लिए उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से महिलाओं को अपने उत्पादों के विपणन का बेहतर अवसर मिलता है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ती हैं।

सरस मेला न केवल व्यापार का मंच है, बल्कि यह मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र बन गया है। मेले में लगे पॉपकॉर्न, चाट, गुपचुप और फल के स्टॉल के साथ बच्चों के लिए ट्रम्पोलिन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जो परिवारों को आकर्षित कर रही हैं।

इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी मेले की रौनक को और बढ़ा दिया है। सरगम ग्रुप कवर्धा के महेश ठाकुर और उनके साथियों ने देशभक्ति और फिल्मी गीतों की शानदार प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं माधवेश केसरी और उनकी टीम ने भी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के बच्चों ने छत्तीसगढ़ी रीमिक्स नृत्य से सभी का मन मोह लिया।

इसके अलावा धनीदास मानिकपुरी, संजय मानिकपुरी, रामखिलावन लांझेकर और उनके साथियों ने पारंपरिक और सूफी गायन की प्रस्तुतियां देकर मेले को यादगार बना दिया।

कुल मिलाकर, कवर्धा का यह सरस मेला न केवल महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रहा है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति, कला और परंपरा को भी बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।