नेपाल में बालेन शाह सरकार पर संकट: गृहमंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा, करप्शन आरोपों से बढ़ी मुश्किलें

नेपाल में बालेन शाह की सरकार पर करप्शन के आरोपों के बीच गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने इस्तीफा दे दिया है। ‘जेन-जी क्रांति’ से उभरी इस सरकार के सामने अब नैतिकता और विश्वसनीयता की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

Apr 22, 2026 - 16:58
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नेपाल में बालेन शाह सरकार पर संकट: गृहमंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा, करप्शन आरोपों से बढ़ी मुश्किलें

UNITED NEWS OF ASIA. नेपाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। नेपाल में हाल ही में बनी बालेन शाह सरकार पर करप्शन के आरोप लगने के बाद संकट गहराता नजर आ रहा है। सरकार बनने के महज कुछ हफ्तों के भीतर ही गृहमंत्री सुदन गुरुंग को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

सुदन गुरुंग, जो ‘जेन-जी क्रांति’ के जरिए राजनीति में उभरकर आए थे, ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि वे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार के हितों के टकराव से बचने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट किया कि नैतिकता उनके लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण है और वे जनता के विश्वास को सर्वोपरि मानते हैं।

गुरुंग पर आय से अधिक संपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग और विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक संबंध रखने के आरोप लगे हैं। साथ ही, माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में निवेश को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ गया, जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में गुरुंग ने कहा कि “आरोप और सच्चाई एक नहीं होते, फैसला सबूतों के आधार पर होना चाहिए।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।

इस घटनाक्रम ने बालेन शाह सरकार की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और पारदर्शिता के वादों के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन अब उसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगना उसकी विश्वसनीयता के लिए चुनौती बन गया है।

सरकार पहले से ही कई विवादों में घिरी हुई है। छात्र संगठनों पर प्रतिबंध और भारत से आने वाले सामानों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने जैसे फैसलों के कारण जनता में असंतोष बढ़ रहा है। काठमांडू सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें छात्र, राजनीतिक दल और आम नागरिक शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Gen Z’ आंदोलन से उभरी इस सरकार के सामने अब अपनी साख बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और दोषियों पर कार्रवाई होती है, तो सरकार अपनी विश्वसनीयता कुछ हद तक बचा सकती है।

फिलहाल, नेपाल की राजनीति एक अहम मोड़ पर खड़ी है, जहां पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता जैसे मुद्दे केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस संकट से कैसे निपटती है और जनता का विश्वास दोबारा जीत पाती है या नहीं।