जंगल में नवजात का जन्म, आरोग्यम केंद्र पर ताला मिलने से भड़का ग्रामीणों का आक्रोश
नेपानगर क्षेत्र के मांडवा जंगल में प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला ने नवजात शिशु को जन्म दिया। महिला लंबे समय तक बेहोशी की हालत में जंगल में पड़ी रही। राहगीरों ने उसे आरोग्यम केंद्र पहुंचाया, लेकिन वहां ताला लगा मिला। बाद में महिला को सिविल स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बुरहानपुर रेफर किया गया। घटना के बाद ग्रामीणों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेश किनगे, नेपानगर l नेपानगर क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया, जिसने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर कर दी। मांडवा के जंगल में प्रसव पीड़ा से गुजर रही एक महिला ने खुले जंगल में ही नवजात शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद महिला लंबे समय तक बेहोशी की हालत में पड़ी रही। राहगीरों की नजर पड़ने पर उसकी जान बच सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह कुछ ग्रामीणों और राहगीरों ने मांडवा जंगल क्षेत्र में एक महिला को अचेत अवस्था में देखा। महिला के पास ही एक नवजात शिशु मौजूद था। यह दृश्य देखकर लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए और महिला को उपचार दिलाने की कोशिश की।
ग्रामीण सबसे पहले महिला और नवजात को मांडवा स्थित आरोग्यम केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने पर केंद्र के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला। आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। मजबूरन महिला को तत्काल सिविल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
सिविल स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों ने महिला और नवजात का प्राथमिक उपचार शुरू किया। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए बुरहानपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया। चिकित्सकों की निगरानी में मां और बच्चे का उपचार जारी है।
घटना के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मांडवा का आरोग्यम केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है और यहां नियमित रूप से कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं रहता। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को छोटी-बड़ी चिकित्सा जरूरतों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार संबंधित अधिकारियों को केंद्र की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होती तो महिला को जंगल में प्रसव जैसी गंभीर परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
इस घटना ने एक बार फिर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मांडवा आरोग्यम केंद्र में नियमित स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए तथा स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल सुचारु किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।