देश में आएंगे 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट, RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर

भारतीय रिजर्व बैंक की नोट छापने वाली इकाई ने 10 और 20 रुपये के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। शुरुआती चरण में इन्हें पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लाया जा सकता है। मौजूदा कागजी नोट पहले की तरह वैध बने रहेंगे।

Jul 17, 2026 - 16:19
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देश में आएंगे 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट, RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर

UNITED NEWS OF ASIA. देश में जल्द ही 10 और 20 रुपये के पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोट देखने को मिल सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नोट मुद्रण इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलीमर नोटों के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। इसके तहत दुनियाभर की कंपनियों से पॉलीमर शीट के निर्माण और आपूर्ति के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) आमंत्रित की गई है। टेंडर में आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त निर्धारित की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जारी किए जा सकते हैं। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलीमर सामग्री में लाए जा सकते हैं। हालांकि अभी इन नोटों के व्यापक स्तर पर जारी होने की कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की गई है।

पॉलीमर नोटों को अपनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनकी मजबूती और लंबी उम्र है। वर्तमान में प्रचलित कागजी नोट जल्दी घिस जाते हैं, फट जाते हैं और नमी या पानी के संपर्क में आने पर खराब हो सकते हैं। इसके विपरीत पॉलीमर नोट अधिक टिकाऊ होते हैं और सामान्य उपयोग में कागजी नोटों की तुलना में लगभग ढाई से चार गुना अधिक समय तक चल सकते हैं।

इन नोटों की एक और बड़ी विशेषता उनकी उन्नत सुरक्षा व्यवस्था है। पॉलीमर नोटों में पारदर्शी सुरक्षा विंडो, आधुनिक सुरक्षा फीचर और विशेष प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे उनकी नकली प्रतियां बनाना काफी कठिन हो जाता है। इसके अलावा इनकी सतह पर गंदगी और बैक्टीरिया अपेक्षाकृत कम टिकते हैं, जिससे इन्हें अधिक स्वच्छ भी माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पॉलीमर नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं बनते, बल्कि विशेष प्रकार की मजबूत पॉलीमर फिल्म पर तैयार किए जाते हैं। इस फिल्म पर विशेष सफेद कोटिंग की जाती है, जिस पर नोट की छपाई होती है। यही तकनीक नोटों को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पॉलीमर नोटों के आने का अर्थ यह नहीं है कि वर्तमान में चल रहे कागजी नोट अमान्य हो जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौजूदा कागजी बैंक नोट पहले की तरह पूरी तरह वैध मुद्रा (लीगल टेंडर) बने रहेंगे और उनका प्रचलन जारी रहेगा। पॉलीमर नोट केवल एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में प्रचलन में शामिल किए जाएंगे।

दुनिया के कई देशों में पहले से पॉलीमर नोटों का सफल उपयोग हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 1988 में सबसे पहले इन्हें अपनाया था। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई सहित 40 से अधिक देशों ने पॉलीमर नोटों को अपनी मुद्रा प्रणाली का हिस्सा बनाया। इन देशों के अनुभव बताते हैं कि शुरुआती लागत अधिक होने के बावजूद लंबे समय में ये नोट अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और किफायती साबित होते हैं।