एवीएस में 'मोरल टॉक' की शुरुआत, आचार्य डॉ. अजय आर्य ने दिए व्यक्तित्व निर्माण के तीन सूत्र

दुर्ग स्थित एवीएस में 'मोरल टॉक' कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रथम सत्र में आचार्य डॉ. अजय आर्य ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को मुस्कान, विनम्रता और जिम्मेदारी को सफल एवं संतुलित जीवन का आधार बताते हुए नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास पर प्रेरक विचार साझा किए।

Jul 17, 2026 - 17:25
Jul 17, 2026 - 17:27
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एवीएस में 'मोरल टॉक' की शुरुआत, आचार्य डॉ. अजय आर्य ने दिए व्यक्तित्व निर्माण के तीन सूत्र

UNITED NEWS OF ASIA. दुर्ग l दुर्ग स्थित एवीएस में विद्यार्थियों और शिक्षकों के व्यक्तित्व विकास तथा नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 'मोरल टॉक' कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में आचार्य डॉ. अजय आर्य ने शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य, जीवन मूल्यों और संतुलित व्यक्तित्व निर्माण पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि केवल किताबों का ज्ञान और डिग्री जीवन में सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि संस्कार, व्यवहार और जिम्मेदारी ही किसी व्यक्ति को वास्तविक अर्थों में शिक्षित बनाते हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ एवीएस के डायरेक्टर डॉ. अवधेश प्रसाद मौर्य और प्राचार्य सुष्मिता दास ने आचार्य डॉ. अजय आर्य का आम्रवृक्ष भेंट कर स्वागत करते हुए किया। स्वागत उद्बोधन में डॉ. अवधेश प्रसाद मौर्य ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का दायरा केवल परीक्षा, अंक और नौकरी तक सीमित होता जा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के नैतिक और व्यवहारिक विकास के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं।

अपने संबोधन में आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि जीवन में बड़ा परिवर्तन छोटी-छोटी अच्छी आदतों से शुरू होता है। यदि व्यक्ति मुस्कुराना, विनम्र व्यवहार करना और अपनी जिम्मेदारियों को स्वीकार करना सीख ले, तो उसका व्यक्तित्व स्वतः निखरने लगता है। उन्होंने कहा कि मुस्कान सबसे सरल लेकिन सबसे मूल्यवान उपहार है, जबकि अभिवादन भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण संस्कार है। सम्मान देना सीखने वाला व्यक्ति समाज में सम्मान, आत्मविश्वास और सफलता भी प्राप्त करता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि व्यक्ति की पहचान उसकी डिग्री से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से होती है। मधुर भाषा और विनम्र संवाद कठिन परिस्थितियों को भी सरल बना सकते हैं। उन्होंने मोबाइल के बढ़ते उपयोग पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि लोग अक्सर समय की कमी की शिकायत करते हैं, जबकि बिना उद्देश्य के घंटों मोबाइल पर समय बिताते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने और सकारात्मक सोच अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। शिक्षिका रश्मि त्रिवेदी द्वारा कार्य के दबाव और तनाव को लेकर पूछे गए प्रश्न पर आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि तनाव का मुख्य कारण काम नहीं, बल्कि उसके प्रति हमारा दृष्टिकोण होता है। जिस कार्य को हम अपनापन और सेवा का भाव देकर करते हैं, उसमें आनंद अधिक और तनाव कम महसूस होता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यालय को केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि अपना परिवार मानकर कार्य करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में विद्यालय की शिक्षिकाएं, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में विद्यालय प्रबंधन ने घोषणा की कि 'मोरल टॉक' का आयोजन अब प्रत्येक माह किया जाएगा। इस मंच पर विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों, शिक्षकों और युवाओं को भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि व्यक्तित्व विकास, सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन, नैतिक मूल्यों, तनाव प्रबंधन और जीवन कौशल जैसे विषयों पर नियमित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके। विद्यालय प्रबंधन ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल समाज में संस्कारित, जिम्मेदार और आत्मविश्वासी नागरिक तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।