चार साल से स्कूल भवन का इंतजार, गरियाबंद के मोतीपानी में गाय के कोठे में पढ़ने को मजबूर 41 बच्चे

गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के मोतीपानी गांव में पिछले चार वर्षों से प्राथमिक स्कूल भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। नए भवन के अभाव में 41 बच्चे गाय के कोठे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Jul 17, 2026 - 18:17
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चार साल से स्कूल भवन का इंतजार, गरियाबंद के मोतीपानी में गाय के कोठे में पढ़ने को मजबूर 41 बच्चे

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के दूरस्थ आदिवासी गांव मोतीपानी से शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां पिछले चार वर्षों से प्राथमिक स्कूल का भवन नहीं होने के कारण 41 मासूम बच्चों को गाय के कोठे में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में अस्थायी व्यवस्था भी नाकाफी साबित हो रही है, जिससे बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2002 में निर्मित प्राथमिक विद्यालय भवन को जर्जर होने के कारण चार वर्ष पहले ध्वस्त कर दिया गया था। इसके बाद नए भवन के निर्माण की स्वीकृति भी मिल गई, लेकिन निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों को अस्थायी स्थान पर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान अस्थायी कक्षाओं में पानी भर जाता है। कई बार बच्चों को भीगते हुए पढ़ाई करनी पड़ती है या फिर कक्षाएं बाधित हो जाती हैं। ऐसे हालात में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। अभिभावकों का कहना है कि बार-बार मांग करने के बावजूद स्कूल भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।

कुछ समय पहले गोना में आयोजित सुशासन शिविर के दौरान जिला कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि 15 जून तक नया स्कूल भवन तैयार कर दिया जाएगा। हालांकि नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन भवन निर्माण अब भी अधूरा है और बच्चे आज भी अपने स्थायी विद्यालय का इंतजार कर रहे हैं।

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने कहा कि भवन निर्माण में आ रही कमियां निर्माण एजेंसियों से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि विभाग बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रहा है। उनके अनुसार कई संवेदनशील क्षेत्रों में ठेकेदार निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर चले गए, जिसके कारण स्कूल भवनों का निर्माण समय पर पूरा नहीं हो सका।

मोतीपानी जैसे दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सुरक्षित और स्थायी विद्यालय भवन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ेगा।

चार वर्षों से अधूरे पड़े स्कूल भवन और अस्थायी व्यवस्था के बीच पढ़ाई कर रहे 41 बच्चों की स्थिति अब कई सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मोतीपानी के बच्चों को उनका अपना स्कूल भवन कब मिलेगा और सरकारी आश्वासन धरातल पर कब उतरेंगे।