US-ईरान तनाव के बीच भारत की बड़ी आर्थिक चाल, 15 जुलाई से लागू होगा UK-India FTA

अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत लगातार नए व्यापार समझौतों पर आगे बढ़ रहा है। 15 जुलाई से भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू होने की संभावना है। इससे भारतीय निर्यातकों, किसानों, एमएसएमई, पेशेवरों और कई उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा, वहीं ब्रिटेन से आयात होने वाली कई वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।

Jul 13, 2026 - 15:15
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US-ईरान तनाव के बीच भारत की बड़ी आर्थिक चाल, 15 जुलाई से लागू होगा UK-India FTA

UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते एक बार फिर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत अपनी व्यापारिक रणनीति को मजबूत करने में जुटा है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत लगातार नए व्यापार समझौतों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

इसी क्रम में भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 15 जुलाई से लागू होने की संभावना है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी है कि समझौता लागू होने के बाद भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलेगा और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

सरकार के अनुसार इस समझौते का लाभ किसानों, मछुआरों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को मिलेगा। भारत के वस्त्र, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, रत्न एवं आभूषण जैसे कई क्षेत्रों के निर्यात को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पीयूष गोयल 14 जुलाई को ब्रसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबित व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा होगी। इससे संकेत मिलता है कि भारत केवल एक देश तक सीमित न रहकर वैश्विक स्तर पर अपने व्यापारिक संबंधों का विस्तार कर रहा है।

भारत-ब्रिटेन एफटीए की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' (DCC) का प्रावधान है। इसके तहत ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को निर्धारित अवधि तक वहां की सामाजिक सुरक्षा योजना में अलग से योगदान नहीं देना होगा। इससे उनकी आय का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहेगा और भारत में भविष्य निधि (पीएफ) जैसे लाभ मिलते रहेंगे।

इस समझौते का असर आम उपभोक्ताओं पर भी दिखाई देगा। एफटीए लागू होने के बाद ब्रिटेन से आयात होने वाली कई वस्तुओं पर शुल्क में चरणबद्ध कमी की जाएगी। इससे लग्जरी कारों, स्कॉच व्हिस्की और अन्य ब्रिटिश उत्पादों की कीमतों में आने वाले वर्षों में कमी देखने को मिल सकती है। वहीं भारतीय उद्योगों के लिए ब्रिटेन का बाजार पहले से अधिक आसान और लाभदायक बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रही है, भारत का लगातार नए व्यापार समझौते करना उसकी दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को दर्शाता है। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि निवेश, रोजगार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका भी और मजबूत होने की उम्मीद है।