स्थानीय लोगों का आरोप है कि नलों से आने वाला पानी न केवल मटमैला है, बल्कि उसमें चिपचिपा पदार्थ भी दिखाई दे रहा है। इससे लोगों में स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। लगातार शिकायतों और विरोध प्रदर्शन के बाद कई पार्षदों ने नगर निगम अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
नगर निगम की टीम ने बिजुल नदी और संबंधित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। साथ ही पानी के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पानी में किस प्रकार का पदार्थ मिला हुआ है और इसकी वास्तविक वजह क्या है।
जानकारी के अनुसार, सिंगरौली नगर निगम के 45 वार्डों में जलापूर्ति के लिए अलग-अलग जल केंद्र बनाए गए हैं। मोरबा जोन में बिजुल नदी से पानी लेकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से शुद्ध करने के बाद पाइपलाइन से घरों तक पहुंचाया जाता है। यह पूरी व्यवस्था लगभग 98 करोड़ रुपये की परियोजना का हिस्सा है। इसके बावजूद समय-समय पर गंदे पानी की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अमृत जल योजना के संचालन में लापरवाही बरती जा रही है। उनका कहना है कि जलापूर्ति का कार्य संभाल रही निजी एजेंसी पर पर्याप्त निगरानी नहीं होने के कारण समस्या लगातार बनी हुई है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इधर, क्षेत्र में यह आशंका भी जताई जा रही है कि बिजुल नदी में कोल वाशरी का अपशिष्ट और खदानों से निकलने वाला प्रदूषित पानी मिल रहा है, जिससे जल स्रोत प्रभावित हो सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री संतोष पांडेय का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदी का पानी कुछ मटमैला हुआ है, लेकिन उसे पूरी प्रक्रिया के तहत शुद्ध कर ही सप्लाई किया जा रहा है। पानी में कोयले जैसी परत दिखाई देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए इंजीनियरों की टीम को मौके पर भेजा गया है और रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।