रतलाम मंडल का हरित ऊर्जा में नवाचार, रेलवे स्कूल में बना 30 किलोवाट का सोलर कारपोर्ट
पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल में 30 किलोवाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र को सोलर कारपोर्ट के रूप में विकसित किया है। इस पहल से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ वाहनों को धूप और बारिश से सुरक्षा भी मिलेगी। रेलवे ने इसे हरित ऊर्जा और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण नवाचार बताया है।
UNITED NEWS OF ASIA. राजेश पुरोहित, रतलाम l पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने हरित ऊर्जा और संसाधनों के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल, रतलाम में 30 किलोवाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र को आधुनिक सोलर कारपोर्ट के रूप में विकसित किया है। यह रतलाम मंडल की पहली पायलट परियोजना है, जिसका लोकार्पण मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय भवन के नवीनीकरण और पुनर्विकास कार्य के चलते पहले स्कूल की छत पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र को हटाना आवश्यक हो गया था। ऐसे में संयंत्र को निष्क्रिय करने के बजाय रतलाम मंडल के विद्युत विभाग ने इसका पुनः उपयोग करने का निर्णय लिया। इसके तहत पार्किंग क्षेत्र के ऊपर सोलर पैनल स्थापित कर इसे सोलर कारपोर्ट का स्वरूप दिया गया।
इस नवाचार से एक साथ कई लाभ मिलने की उम्मीद है। पार्किंग क्षेत्र का बेहतर उपयोग होने के साथ वाहनों को धूप और बारिश से सुरक्षा मिलेगी। वहीं सौर ऊर्जा का उत्पादन भी निरंतर जारी रहेगा। पहले से उपलब्ध सौर संयंत्र के पुनः उपयोग से नई परियोजना की लागत में भी बचत हुई है, जिससे यह संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का उदाहरण बन गई है।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि यह परियोजना भविष्य में अन्य रेलवे परिसरों और सरकारी संस्थानों के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर भवनों की छत उपलब्ध नहीं है या जहां पुनर्विकास कार्य चल रहा है, वहां सोलर कारपोर्ट जैसी व्यवस्था प्रभावी और व्यावहारिक विकल्प बन सकती है।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन और पार्किंग सुविधा को एक साथ जोड़ने की यह अवधारणा संसाधनों के कुशल उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर लेफ्टिनेंट डी.के. प्रजापति तथा परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 30 किलोवाट क्षमता वाला यह सोलर कारपोर्ट पश्चिम रेलवे की हरित ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सतत रेलवे अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
पश्चिम रेलवे का मानना है कि यह पहल केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के नवाचारपूर्ण उपयोग का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य रेलवे मंडलों और सरकारी संस्थानों में भी अपनाया जा सकता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिलेगी।