आलीराजपुर में खुले में मिले सरकारी रिकॉर्ड का मामला गरमाया, SIT जांच की उठी मांग

आलीराजपुर में जनजातीय कार्य विभाग के सरकारी रिकॉर्ड खुले में मिलने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिकायत भेजकर SIT जांच, दोषियों पर एफआईआर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Jul 10, 2026 - 15:30
Jul 10, 2026 - 15:31
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आलीराजपुर में खुले में मिले सरकारी रिकॉर्ड का मामला गरमाया, SIT जांच की उठी मांग

UNITED NEWS OF ASIA. मुस्तकीम मुगल, आलीराजपुर l जनजातीय कार्य विभाग के करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों और वित्तीय अभिलेख खुले में मिलने का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र SIT जांच कराने, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

महेश पटेल का आरोप है कि विभाग के महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखे जाने के बजाय खुले खंडहर में बिखरे हुए मिले। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों से जुड़े अभिलेख, तकनीकी स्वीकृतियां, टेंडर प्रक्रिया, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। ऐसे संवेदनशील अभिलेखों का खुले में मिलना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब यह मामला मीडिया के माध्यम से सामने आया तो संबंधित अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड को जल्दबाजी में वहां से हटाने का प्रयास किया गया। परिषद का कहना है कि यदि दस्तावेज सुरक्षित और व्यवस्थित थे, तो उन्हें तत्काल हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम ने रिकॉर्ड की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में परिषद ने छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें पूरे मामले की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच अथवा SIT का गठन, सभी सरकारी रिकॉर्ड का फिजिकल वेरिफिकेशन, जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ पर रोक, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना, भारतीय न्याय संहिता के तहत दोषियों पर एफआईआर दर्ज करना तथा जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना शामिल है।

इसके अलावा महेश पटेल ने प्रशासन के सामने 15 महत्वपूर्ण सवाल भी रखे हैं। उन्होंने पूछा है कि गोपनीय सरकारी दस्तावेज खुले स्थान पर कैसे पहुंचे, रिकॉर्ड रूम उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें बाहर रखने का निर्णय किसने लिया, यदि दस्तावेज महत्वहीन थे तो उन्हें हटाने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई और यदि जांच में कोई रिकॉर्ड गायब मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी।

परिषद ने शिकायत की प्रतिलिपि जनजातीय कार्य मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, संभागायुक्त इंदौर, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी है। परिषद का कहना है कि सरकारी अभिलेख सार्वजनिक संपत्ति और शासन की महत्वपूर्ण धरोहर हैं, इसलिए इनके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

अब इस पूरे मामले में सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी रिकॉर्ड खुले में कैसे पहुंचे, कहीं अभिलेखों से छेड़छाड़ तो नहीं हुई और इस पूरे घटनाक्रम के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।