गगनयान मिशन से पहले ISRO को बड़ी सफलता, मुख्य पैराशूट सिस्टम का परीक्षण सफल

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारी में ISRO को बड़ी सफलता मिली है। मध्य प्रदेश के श्योपुर में 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से क्रू मॉड्यूल के मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया। यह सिस्टम अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Jul 9, 2026 - 15:33
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गगनयान मिशन से पहले ISRO को बड़ी सफलता, मुख्य पैराशूट सिस्टम का परीक्षण सफल

UNITED NEWS OF ASIA. भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारियों के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को एक बड़ी तकनीकी सफलता मिली है। अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने वाले मुख्य पैराशूट सिस्टम का महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ गया है।

ISRO ने जानकारी दी कि क्रू मॉड्यूल के मुख्य पैराशूट का परीक्षण मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित एडीआरडीई (ADRDE) के ड्रॉप जोन में किया गया। परीक्षण के दौरान भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर डमी भार के साथ पैराशूट सिस्टम को छोड़ा गया। पूरे परीक्षण के दौरान पैराशूट ने निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य किया और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की।

इसरो के अनुसार IMAT-05 नाम से किए गए इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य उस पैराशूट सिस्टम की क्षमता और विश्वसनीयता का परीक्षण करना था, जो गगनयान क्रू मॉड्यूल को अंतरिक्ष से लौटते समय अत्यधिक गति से नियंत्रित करते हुए सुरक्षित समुद्र में उतारेगा। परीक्षण के दौरान सबसे पहले पैराशूट खुलकर क्रू मॉड्यूल की गति को नियंत्रित करने में सफल रहा और इसके बाद डमी भार सुरक्षित गति से जमीन तक पहुंच गया।

गगनयान मिशन के लिए विकसित रिकवरी सिस्टम में कुल चार अलग-अलग प्रकार के 10 पैराशूट लगाए गए हैं। इनका उपयोग अलग-अलग चरणों में किया जाएगा। जब क्रू मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तब उसकी गति अत्यधिक होती है। ऐसे में पैराशूट सिस्टम क्रमबद्ध तरीके से खुलकर उसकी रफ्तार कम करता है और अंत में सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करता है।

गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और मिशन पूरा होने के बाद सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। इस मिशन के लिए ISRO लगातार विभिन्न प्रणालियों और सुरक्षा उपकरणों का परीक्षण कर रहा है ताकि उड़ान के दौरान किसी भी प्रकार का जोखिम न्यूनतम रखा जा सके।

मुख्य पैराशूट प्रणाली का सफल परीक्षण गगनयान मिशन की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे मिशन की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी विश्वसनीयता को और मजबूती मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सफल परीक्षण भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा देंगे और भविष्य में देश को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।