बद्रीनाथ चढ़ावा मामले पर त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान, बोले- देवस्थानम बोर्ड होता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा अनियमितता मामले को लेकर भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यदि देवस्थानम बोर्ड होता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं, राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

Jul 9, 2026 - 12:26
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बद्रीनाथ चढ़ावा मामले पर त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान, बोले- देवस्थानम बोर्ड होता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती

UNITED NEWS OF ASIA. देहरादून। बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि यदि देवस्थानम बोर्ड की व्यवस्था लागू होती तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि वे पहले भी देवस्थानम बोर्ड के पक्ष में अपनी राय रखते रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसी व्यवस्था में कार्य अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में जांच पूरी निष्पक्षता से होनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद उत्तराखंड सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है।

सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल के आयुक्त करेंगे। समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है। समिति को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

पर्यटन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त दान-चढ़ावे से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। जांच के दौरान समिति आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों, विशेषज्ञों और अन्य व्यक्तियों से जानकारी एवं सहयोग भी ले सकेगी।

सरकार ने समिति को यह भी जिम्मेदारी दी है कि वह केवल कथित अनियमितताओं की जांच ही नहीं करेगी, बल्कि भविष्य में दान-चढ़ावे के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक सुझाव भी प्रस्तुत करेगी। समिति को अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर शासन को सौंपनी है।

बद्रीनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दान-चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीर माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और समिति उपलब्ध दस्तावेजों, अभिलेखों तथा संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।