NEET पेपर लीक के बाद सवालों में NTA, 50 रुपये में हुआ था रजिस्ट्रेशन

NEET पेपर लीक विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी सामने आई है कि NTA का गठन एक सोसायटी मॉडल के तहत मात्र 50 रुपये के पंजीकरण शुल्क पर किया गया था। अब इसकी तुलना UPSC और SSC जैसी संस्थाओं से की जा रही है, जिनकी संरचना और जवाबदेही अधिक मजबूत मानी जाती है।

May 18, 2026 - 12:33
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NEET पेपर लीक के बाद सवालों में NTA, 50 रुपये में हुआ था रजिस्ट्रेशन

UNITED NEWS OF ASIA. देश की प्रमुख परीक्षा एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। NEET पेपर लीक मामले के बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच यह जानकारी सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया है कि NTA का गठन केवल 50 रुपये के पंजीकरण शुल्क के साथ एक सोसायटी मॉडल के तहत किया गया था।

NTA की स्थापना वर्ष 2018 में देशभर की प्रवेश परीक्षाओं को एक समान और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के उद्देश्य से की गई थी। एजेंसी को मेडिकल, इंजीनियरिंग, विश्वविद्यालय प्रवेश और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि हाल के वर्षों में कई परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों ने इसकी साख पर असर डाला है।

जानकारी के अनुसार NTA कोई संवैधानिक संस्था या पूर्ण स्वायत्त निकाय नहीं है, बल्कि यह सोसायटी एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था के रूप में काम करती है। इसी कारण इसकी तुलना अब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) जैसी संस्थाओं से की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि UPSC जैसी संस्थाओं की संवैधानिक स्थिति और जवाबदेही अधिक मजबूत होती है, जबकि NTA का ढांचा अपेक्षाकृत कमजोर माना जा रहा है।

NEET पेपर लीक मामले के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए गए। छात्रों का कहना है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गर्मा गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार ने मामले की जांच के लिए कार्रवाई शुरू की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परीक्षाओं का संचालन करने वाली संस्था के लिए मजबूत प्रशासनिक ढांचा और जवाबदेही बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि केवल तकनीकी सुधार ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र भी जरूरी है।

NEET पेपर लीक विवाद ने एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं।