दिल्ली सरकार ने 6.2 करोड़ की VIP AC बोट योजना रद्द की, दो अधिकारी निलंबित
दिल्ली सरकार ने 6.2 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित लग्जरी VIP AC बोट खरीद योजना को रद्द कर दिया है। इस मामले में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है और पूरे प्रकरण की जांच जारी है।
UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली में सरकारी खर्च और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। दिल्ली सरकार ने 6.2 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित दो लग्जरी VIP एयर-कंडीशन्ड (AC) बोट की खरीद योजना को रद्द कर दिया है। इस फैसले के साथ ही इस परियोजना से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
इस मामले की जानकारी देते हुए मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा जारी किए गए टेंडर को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
मंत्री के अनुसार, संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर को बिना पूर्व अनुमति के टेंडर जारी करने के आरोप में सस्पेंड किया गया है। यह कार्रवाई प्रशासनिक प्रक्रिया के उल्लंघन को देखते हुए की गई है।
इस योजना को लेकर पहले ही राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताया था। विपक्ष का कहना था कि जब राजधानी में कई बुनियादी समस्याएं मौजूद हैं, तब इस तरह की लग्जरी सुविधाओं पर खर्च करना उचित नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 मार्च को जैसे ही इस योजना की जानकारी सामने आई, उसी दिन मंत्री ने टेंडर प्रक्रिया की जांच के आदेश दे दिए थे। शुरुआत में टेंडर की अंतिम तिथि 18 मार्च तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 27 मार्च कर दिया गया। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच अंततः पूरे टेंडर को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
इन प्रस्तावित बोट्स की सुविधाओं को देखकर यह स्पष्ट था कि इन्हें विशेष रूप से VIP उपयोग के लिए डिजाइन किया गया था। प्रत्येक बोट में 16 से 20 लोगों के बैठने की क्षमता रखी गई थी। इसके अलावा इनमें रूफटॉप मरीन एयर कंडीशनर, बिजनेस क्लास जैसी पुश-बैक सीटें, अलग पेंट्री, ओपन डेक और वीआईपी के लिए सोफा सीट्स जैसी लग्जरी सुविधाएं शामिल थीं।
दस्तावेजों के अनुसार, बोट के अंदरूनी हिस्से को प्रीमियम लुक देने के लिए वीगन लेदर सीटिंग, लकड़ी की फिनिश, छिपी हुई एलईडी लाइटिंग और एम्बिएंट लाइटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी प्रस्तावित थीं।
हालांकि सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की बोट खरीद केवल आवश्यक सरकारी कार्यों तक ही सीमित रहेगी। इसमें मुख्य रूप से निगरानी, प्रदूषण मॉनिटरिंग और अन्य संचालन से जुड़े कार्य शामिल होंगे।
सरकार ने यह भी दोहराया है कि यमुना नदी की सफाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। राजधानी में पल्ला से बदरपुर तक लगभग 48 किलोमीटर और वजीराबाद बैराज से ओखला क्षेत्र तक करीब 26 किलोमीटर का हिस्सा प्रदूषण के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि सरकार अब गैर-जरूरी खर्चों पर सख्ती बरतने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठा रही है। वहीं, विपक्ष इसे अपनी जीत के रूप में भी देख रहा है, जिसने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।