वीडियो में सैनिकों की माताएं भावुक होकर अपने बेटों को याद करती नजर आती हैं। ग्लोबल टाइम्स ने वीडियो के साथ लिखा कि मदर्स डे से पहले गलवान संघर्ष में मारे गए सैनिकों चेन जियांगरोंग, शियाओ सियुआन और वांग झूओरान की माताओं ने सैन्य संग्रहालय का दौरा किया और अपने बेटों की प्रतिमाओं से लिपटकर उन्हें याद किया।
हालांकि इस वीडियो के जरिए चीन ने एक बार फिर यह दावा दोहराया कि गलवान संघर्ष में उसके केवल तीन सैनिक मारे गए थे। जबकि भारत समेत कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में चीनी सैनिकों के कहीं ज्यादा हताहत होने की बात कही गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन लंबे समय से गलवान संघर्ष को लेकर नियंत्रित नैरेटिव पेश करता रहा है और यह वीडियो भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दरअसल, 15 जून 2020 की रात लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। यह संघर्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर बढ़ते तनाव के बीच हुआ था। दोनों देशों के बीच पहले सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन भारतीय सेना को चीनी गतिविधियों में बदलाव दिखाई देने के बाद स्थिति बिगड़ गई।
इसके बाद भारतीय सेना की ओर से कर्नल बी. संतोष बाबू के नेतृत्व में सैनिक बातचीत के लिए आगे बढ़े। इसी दौरान दोनों सेनाओं के बीच हिंसक भिड़ंत शुरू हो गई। संघर्ष में चीनी सैनिकों द्वारा पत्थरों, लोहे की रॉड और कांटेदार डंडों के इस्तेमाल की बात सामने आई थी।
इस झड़प में भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। वहीं कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि चीन के 40 से अधिक सैनिक मारे गए थे, लेकिन चीन ने कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की। काफी समय बाद चीन ने केवल चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी।
गलवान संघर्ष को भारत-चीन सीमा पर पिछले कई दशकों का सबसे गंभीर सैन्य टकराव माना जाता है। इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी तनाव आ गया था और सीमा पर सैन्य गतिविधियां बढ़ गई थीं।
अब पांच साल बाद मदर्स डे जैसे भावनात्मक मौके पर वीडियो जारी कर चीन ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश की है। खास बात यह है कि यह वीडियो ग्लोबल टाइम्स के अंग्रेजी सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि चीन अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक भी अपना संदेश पहुंचाना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक रणनीतिक प्रोपगैंडा अभियान भी हो सकता है, जिसका उद्देश्य गलवान संघर्ष को लेकर चीन की आधिकारिक कहानी को फिर से स्थापित करना है। वहीं भारत में इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।