चुनाव आयोग ने नंदीग्राम के पुलिस ऑब्जर्वर हितेश चौधरी को हटाकर उनकी जगह अखिलेश सिंह को नियुक्त किया है। अखिलेश सिंह एक अनुभवी अधिकारी हैं, जो पहले कोलकाता में सीबीआई के साथ कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में असम में आईजी के पद पर तैनात हैं। उनकी नियुक्ति को चुनाव के दौरान निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह निर्णय उस समय लिया गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने नंदीग्राम पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। पार्टी ने दावा किया कि पुलिस भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रही है और पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है। इस संबंध में TMC ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद आयोग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए हितेश चौधरी को हटाने का आदेश जारी किया। इससे पहले भी आयोग राज्य के अन्य क्षेत्रों—मालदा और जंगीपुर—में पुलिस ऑब्जर्वर बदल चुका है, जो यह दर्शाता है कि आयोग चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए सतर्क है।
नंदीग्राम विधानसभा सीट इस चुनाव की सबसे चर्चित और संवेदनशील सीटों में से एक मानी जा रही है। यहां राजनीतिक मुकाबला बेहद कड़ा है, जिस कारण सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुल 84 पुलिस ऑब्जर्वर तैनात किए हैं। इनका मुख्य कार्य मतदान के दौरान शांति और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है, ताकि मतदाता बिना किसी दबाव या डर के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।
पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को निर्धारित है। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदान से ठीक पहले इस तरह के फैसले चुनावी माहौल पर असर डाल सकते हैं, लेकिन साथ ही यह भी दर्शाते हैं कि चुनाव आयोग किसी भी प्रकार की शिकायत को गंभीरता से ले रहा है।
कुल मिलाकर, नंदीग्राम में पुलिस ऑब्जर्वर का बदलाव चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 23 अप्रैल को होने वाले मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हैं।