ईरान-अमेरिका तनाव पर राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: “समय आने पर भारत निभा सकता है मध्यस्थ की भूमिका”
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में भारत दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नरेंद्र मोदी पहले ही दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति की अपील कर चुके हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत सामने आया है। राजनाथ सिंह ने जर्मनी के दौरे के दौरान एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि भविष्य में भारत इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर सकता है और इसमें सफलता भी हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि हर स्थिति का एक सही समय होता है और यह संभव है कि आने वाले समय में भारत शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और कई देश इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
रक्षामंत्री ने यह भी बताया कि भारत पहले ही इस दिशा में प्रयास कर चुका है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से सीधे बातचीत की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत कर युद्ध समाप्त करने और शांति स्थापित करने की अपील की थी।
हालांकि, अब तक इस दिशा में ठोस सफलता नहीं मिल सकी है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देश भी इस विवाद में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत आयोजित करवाई थी, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरानी पक्ष का नेतृत्व मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने किया।
करीब 21 घंटे चली इस बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद वार्ता प्रक्रिया ठप हो गई और स्थिति फिर से अनिश्चित हो गई। हालांकि, बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा की, ताकि बातचीत के लिए समय मिल सके।
राजनाथ सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकटों में धैर्य और सही समय का इंतजार करना बेहद जरूरी होता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत की कूटनीतिक स्थिति और वैश्विक साख उसे भविष्य में एक प्रभावी मध्यस्थ बना सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की तटस्थ और संतुलित विदेश नीति उसे ऐसे संवेदनशील मुद्दों में विश्वसनीय बनाती है। भारत के दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, जो उसे मध्यस्थता के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बनाते हैं।
कुल मिलाकर, राजनाथ सिंह का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक महत्व को दर्शाता है। आने वाले समय में यदि हालात अनुकूल होते हैं, तो भारत वास्तव में ईरान और अमेरिका के बीच शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।