रायपुर में ओवररेटिंग का खेल जारी: कमिश्नरेट सिस्टम और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
राजधानी रायपुर में शराब दुकानों में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने और जनप्रतिनिधियों के निर्देशों के बावजूद ओवररेटिंग पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। उपभोक्ताओं ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
रायपुर में ओवररेटिंग का खेल जारी: कमिश्नरेट सिस्टम और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर। राजधानी रायपुर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के दावे किए गए थे, लेकिन शराब दुकानों में ओवररेटिंग का खेल अब भी जारी है। शासन द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि कोचियागिरी और ओवररेटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद राजधानी और आसपास के क्षेत्रों की कई शराब दुकानों में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
जानकारों का कहना है कि पहले जहां खुलेआम ओवररेटिंग की जाती थी, वहीं अब भीड़भाड़ वाले समय—विशेषकर सुबह और शाम—का फायदा उठाकर अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। कई उपभोक्ताओं को यह तक पता नहीं चल पाता कि उनसे निर्धारित मूल्य से अधिक पैसा लिया गया है।
इस मामले में जब दुकानों से जुड़े कर्मचारियों और जिम्मेदार लोगों से चर्चा की गई तो कई चौंकाने वाले तर्क सामने आए। सूत्रों के अनुसार कुछ लोगों का कहना है कि टूट-फूट की भरपाई, संचालन खर्च और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अतिरिक्त राशि लेना पड़ता है। हालांकि यह तर्क नियमों और उपभोक्ता अधिकारों के दृष्टिकोण से गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा प्रश्न आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद यदि ओवररेटिंग का सिलसिला जारी है तो क्या विभागीय अधिकारी इससे अनभिज्ञ हैं या फिर कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है? आम लोगों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी की कमी के बिना ऐसा संगठित खेल लंबे समय तक संभव नहीं हो सकता।
शराब दुकानों के सुपरवाइजरों की जिम्मेदारी निर्धारित मूल्य पर बिक्री सुनिश्चित करना है। यदि उनके कार्यकाल में उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है तो उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। वहीं आबकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित कर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भी है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि राजधानी की सभी शराब दुकानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की जाए तथा दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों, सुपरवाइजरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने वालों को संरक्षण मिलता रहेगा और कब आबकारी विभाग अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए इस अवैध वसूली पर प्रभावी अंकुश लगाएगा?