धुंधले बिलों से ₹9.92 लाख के भुगतान पर उठे सवाल, जांच के बाद कार्रवाई की बात
सिंगरौली जिले की ग्राम पंचायत कुड़ैनिया प्रथम में पंचायत दर्पण पोर्टल पर ₹9.92 लाख के भुगतान से जुड़े धुंधले बिलों को लेकर सवाल उठे हैं। जनपद पंचायत चितरंगी के सीईओ ने मामले में जांच और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली l सिंगरौली जिले की चितरंगी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कुड़ैनिया प्रथम में पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज लगभग 9 लाख 92 हजार 935 रुपये के भुगतान को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि पोर्टल पर अपलोड किए गए कई बिल इतने धुंधले और अपठनीय हैं कि यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि भुगतान किस कार्य, सामग्री या सेवा के लिए किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
जानकारी के अनुसार पंचायत दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के दौरान कई बिलों की गुणवत्ता इतनी खराब पाई गई कि उनमें दर्ज विवरण पढ़ना संभव नहीं है। ऐसे में भुगतान की पारदर्शिता और अभिलेखों की विश्वसनीयता को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच, पोर्टल पर शुभम इंटरप्राइजेज और लक्ष्मण इंटरप्राइजेज के नाम से अपलोड कुछ बिलों में मजदूरी मद का उल्लेख होने और करीब 4.98 लाख रुपये के भुगतान का दावा भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित भुगतान किन कार्यों के लिए किया गया और दस्तावेजों में दर्ज जानकारी पूरी तरह सही है या नहीं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
मामले को लेकर जनपद पंचायत चितरंगी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने कहा कि पंचायत सचिवों और संबंधित कर्मचारियों को कई बार बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि पंचायत दर्पण पोर्टल पर केवल स्पष्ट, पूर्ण और पठनीय दस्तावेज ही अपलोड किए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी कर्मचारी या अधिकारी ने लापरवाही बरती है अथवा नियमों का पालन नहीं किया है, तो संबंधितों को नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायतों में वित्तीय लेन-देन और विकास कार्यों की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में अपठनीय दस्तावेज अपलोड होना स्वीकार्य नहीं है और यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा।
फिलहाल इस मामले में किसी वित्तीय अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भुगतान प्रक्रिया, अपलोड किए गए दस्तावेजों और संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल तकनीकी लापरवाही का है या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता भी हुई है।
अब सभी की निगाहें प्रस्तावित जांच पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।