बरवाडीह-अम्बिकापुर रेल लाइन: पुरानी जमीन मौजूद, फिर भी नए ट्रैक का निर्माण क्यों? बलरामपुर में भड़का जनआक्रोश

बरवाडीह से बलरामपुर सरनाडीह होते हुए छत्तीसगढ़ के रामनगरकला तक प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित रेलवे लाइन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों और कानूनी जानकारों का दावा है कि बरवाडीह से बलरामपुर सरनाडीह तक रेलवे की अधिग्रहित जमीन पहले से मौजूद और दर्ज है, इसके बावजूद बलरामपुर से रामनगरकला के बीच पुरानी जमीन को छोड़कर नए रूट पर ट्रैक निर्माण किए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने रेलवे और जिला प्रशासन से पुराने अधिग्रहित रूट पर ही निर्माण कार्य पूरा करने की मांग की है।

Aug 15, 2026 - 12:30
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बरवाडीह-अम्बिकापुर रेल लाइन: पुरानी जमीन मौजूद, फिर भी नए ट्रैक का निर्माण क्यों? बलरामपुर में भड़का जनआक्रोश

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर में दशकों से जिस रेल लाइन का सपना इस इलाके की जनता देख रही थी, वह अब उम्मीदों के साथ-साथ कई सवाल और आक्रोश भी खड़े कर रही है। मामला बरवाडीह से बलरामपुर सरनाडीह होते हुए छत्तीसगढ़ के रामनगरकला तक बनने वाली बहुप्रतीक्षित रेलवे लाइन का है। इस रेल परियोजना को लेकर क्षेत्र के लोगों में लंबे समय से उम्मीद बनी हुई है कि रेलवे कनेक्टिविटी मिलने से इलाके के विकास, आवागमन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। लेकिन अब प्रस्तावित ट्रैक के रूट को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

स्थानीय लोगों और कानूनी जानकारों का स्पष्ट मानना है कि न्यायिक दृष्टिकोण से बरवाडीह से बलरामपुर सरनाडीह तक भारत सरकार को किसी भी नई भूमि अधिग्रहण की कोई जरूरत ही नहीं है। उनका कहना है कि आज भी इस पूरे रूट पर रेलवे की अधिग्रहित जमीन साफ तौर पर मौजूद और दर्ज है। ऐसे में पुरानी उपलब्ध रेलवे जमीन का उपयोग किए जाने के बजाय नए रूट पर ट्रैक निर्माण शुरू किए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

2023 में जागी थी उम्मीद की किरण

साल 2023 में जब इस ट्रैक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार हुई, तो दशकों से इंतजार कर रही जनता के दिलों में उम्मीद की नई किरण जगी। जगह-जगह मिट्टी का परीक्षण यानी सॉयल टेस्टिंग शुरू हुआ और बलरामपुर सरनाडीह में जंक्शन तथा ट्रैक निर्माण के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें तैनात की गईं। इन गतिविधियों को देखकर स्थानीय लोगों को लगा कि अब जल्द ही उनके इलाके में छुक-छुक करती ट्रेन दौड़ेगी और क्षेत्र का लंबे समय से देखा जा रहा रेल कनेक्टिविटी का सपना पूरा होगा।

अचानक बदला फैसला: पुरानी जमीन छोड़ नया रूट?

लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब बलरामपुर सरनाडीह से रामनगरकला छत्तीसगढ़ के बीच पुरानी उपलब्ध जमीन को छोड़कर, उससे कुछ ही दूरी पर नए ट्रैक का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब रेलवे के लिए पुरानी अधिग्रहित जमीन पहले से मौजूद है, तो फिर नए रूट का चयन क्यों किया गया।

हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि उगरा, बरगढ़ और भण्डरिया से लेकर बरवाडीह तक के बाकी पूरे हिस्से में ट्रैक को पुरानी लाइन पर ही रखा गया है, तो सिर्फ बलरामपुर से रामनगरकला के बीच नया रूट क्यों चुना गया। इसी सवाल को लेकर क्षेत्र के लोगों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

जनता में भारी आक्रोश, अधिकारियों से गुहार

रेलवे के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के बलरामपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भारी जनआक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों ने नए रूट का विरोध करते हुए रेलवे अधिकारियों और बलरामपुर जिला प्रशासन के आला अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्या और मांग सामने रखी है। लोगों ने अधिकारियों से निवेदन किया है कि जब पहले से ही पर्याप्त जमीन और जंक्शन के लिए जगह मौजूद है, तो अरबों रुपये का अतिरिक्त खर्च करके और लोगों की जमीनें लेकर नया ट्रैक क्यों बनाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि रेलवे परियोजना के निर्माण कार्य को पुरानी अधिग्रहित जमीन पर ही पूरा किया जाए, ताकि अनावश्यक रूप से नई जमीन लेने की जरूरत न पड़े और प्रभावित ग्रामीणों की जमीन भी सुरक्षित रह सके। लोगों का कहना है कि वर्षों के इंतजार के बाद रेल लाइन का सपना पूरा होने जा रहा है, ऐसे में परियोजना का निर्माण जनहित, उपलब्ध भूमि और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।