यह अपग्रेडेशन केंद्र सरकार की PM E-DRIVE पहल के तहत किया जा रहा है। भारी उद्योग मंत्रालय के नेशनल ऑटोमोटिव बोर्ड के अंतर्गत संचालित GARC ऑटोमोबाइल क्षेत्र में वाहनों की स्वीकृति, रिसर्च और मानक जांच से जुड़ी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वीकृत राशि से लैब और टेस्टिंग ट्रैक के लिए आधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं। कई उपकरणों के ऑर्डर दिए जा चुके हैं और नए टेस्टिंग सेटअप पर काम शुरू किया गया है।
EV और बैटरी सेफ्टी पर जोर
GARC के नए अपग्रेडेशन में इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों की अलग-अलग परिस्थितियों में जांच के लिए आधुनिक टेस्टिंग सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की Electromagnetic Compatibility (EMC) जांच की सुविधा भी विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम आपस में हस्तक्षेप किए बिना निर्धारित तरीके से काम करें।
भारी वाणिज्यिक वाहनों, जिनमें बस और ट्रक शामिल हैं, के साथ पारंपरिक इंजन वाले वाहनों की परफॉर्मेंस और पावर टेस्टिंग सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
ADAS और क्रैश टेस्टिंग होगी आधुनिक
वाहन सुरक्षा से जुड़ी टेस्टिंग में Advanced Driver Assistance Systems यानी ADAS और क्रैश टेस्टिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए नई पीढ़ी की क्रैश टेस्ट डमी और उनकी कैलिब्रेशन यूनिट स्थापित की जा रही हैं।
क्रैश टेस्ट के दौरान वाहन की संरचना, टक्कर के प्रभाव और पैसेंजर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण करने के लिए 4K हाई-स्पीड कैमरा नेटवर्क भी लगाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह सिस्टम प्रति सेकंड 750 से 3,000 फ्रेम तक रिकॉर्ड कर सकता है।
इस तकनीक के माध्यम से फ्रंट, साइड और रियर क्रैश टेस्ट के दौरान वाहन के स्ट्रक्चर में होने वाले बदलाव, एयरबैग खुलने की टाइमिंग और टक्कर के प्रभाव को बारीकी से रिकॉर्ड किया जा सकेगा। इससे टेस्टिंग के दौरान प्राप्त डेटा के आधार पर वाहन सुरक्षा से जुड़े तकनीकी विश्लेषण में मदद मिलने की उम्मीद है।
ऑटो टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
PM E-DRIVE योजना के तहत देश में ऑटोमोटिव टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 780 करोड़ रुपये की राशि आरक्षित किए जाने की जानकारी दी गई है। योजना के तहत 31 मार्च 2028 तक टेस्टिंग सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
GARC में विकसित की जा रही आधुनिक सुविधाओं से इलेक्ट्रिक वाहनों, पारंपरिक वाहनों और भारी वाहनों की टेस्टिंग के लिए देश में उपलब्ध बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है। घरेलू स्तर पर आधुनिक टेस्टिंग सुविधाएं उपलब्ध होने से वाहन निर्माताओं को नई तकनीकों और वाहनों की जांच के लिए बेहतर आधार मिल सकेगा।