बलरामपुर में आदिवासी विकास और पंचायत विभागों में प्रभार बदलने पर विवाद, शासन के निर्देशों की अनदेखी के आरोप

बलरामपुर जिले के आदिवासी विकास और पंचायत विभागों में अधिकारियों के प्रभार बदलने को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, शासन के निर्देशों के बावजूद कुछ जिलों में सहायक आयुक्त, सहायक संचालक और जनपद पंचायत CEO जैसे पदों का प्रभार बिना अनुमति बदले जाने के आरोप हैं। कार्य आवंटन में देरी और न्यायालयीन प्रकरणों के चलते विभागीय कामकाज तथा विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ने की बात कही गई है।

Oct 29, 2026 - 15:30
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बलरामपुर में आदिवासी विकास और पंचायत विभागों में प्रभार बदलने पर विवाद, शासन के निर्देशों की अनदेखी के आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिले के आदिवासी विकास और पंचायत विभागों में अधिकारियों के प्रभार परिवर्तन को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ जिलों में कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) अपने स्तर पर अधिकारियों के प्रभार में बदलाव कर रहे हैं। इस संबंध में विभागीय कामकाज प्रभावित होने और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त, सहायक संचालक और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों का प्रभार अन्य विभागों के अधिकारियों को नहीं सौंपा जाना चाहिए। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ जिलों में शासन को जानकारी दिए बिना अधिकारियों के प्रभार बदलने की कार्रवाई की जा रही है। इससे विभागीय नियमों के पालन और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आरोपों के अनुसार, प्रभार परिवर्तन के बाद कई बार अधिकारियों को लंबे समय तक कार्य आवंटन नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी बिना स्पष्ट जिम्मेदारी के रह जाते हैं और विभागीय कामकाज प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। योजनाओं से संबंधित फाइलों के लंबित रहने और मैदानी स्तर पर कार्यों की गति धीमी पड़ने की शिकायत भी सामने आई है।

विकास योजनाओं पर पड़ सकता है असर

आदिवासी विकास और पंचायत विभागों के अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित नहीं है। इनके माध्यम से आदिवासी समुदायों के विकास के लिए वार्षिक योजनाएं तैयार करने, शासन की कल्याणकारी योजनाओं का संचालन करने, ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की स्वीकृति देने और उनकी गुणवत्ता की निगरानी करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायतों से प्राप्त विकास प्रस्तावों का समन्वय और योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी इनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

ऐसे में यदि महत्वपूर्ण पदों पर बार-बार प्रभार परिवर्तन होता है या अधिकारियों को समय पर कार्य आवंटित नहीं किया जाता, तो योजनाओं की निरंतरता और कामकाज की गति प्रभावित हो सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्रगति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

न्यायालयीन प्रकरणों को लेकर भी चिंता

विभागीय सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों के प्रभार में बदलाव और नियमों की कथित अनदेखी के चलते बीते एक वर्ष में कई न्यायालयीन प्रकरण सामने आए हैं। इन मामलों को प्रशासनिक प्रक्रिया और शासन के आदेशों के अनुपालन से जुड़ा गंभीर विषय बताया जा रहा है। हालांकि, संबंधित मामलों की संख्या, प्रकृति और न्यायालयों के आदेशों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं है।

अब निगाहें शासन के रुख और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि अधिकारियों के प्रभार परिवर्तन और कार्य आवंटन की प्रक्रिया में स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। नियमों के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था, समयबद्ध कार्य आवंटन और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण ही विभागीय कामकाज को सुचारू रखने तथा विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मददगार हो सकता है।