US Fed ने 3 साल बाद बढ़ाई ब्याज दर, 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी; आज भारत के बाजार पर दिख सकता है असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर की बैठक के बाद ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। 2023 के बाद यह पहली दर वृद्धि बताई जा रही है। इस फैसले के बाद अमेरिका में ब्याज दर का दायरा 3.75% से बढ़कर 4% हो गया है। महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच लिए गए इस फैसले का असर भारत के शेयर बाजार, रुपये और विदेशी निवेश पर देखने को मिल सकता है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने सितंबर की दो दिवसीय बैठक के बाद ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। फेड ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2023 के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाई है। इस बढ़ोतरी के बाद अमेरिका में ब्याज दरों का नया दायरा 3.75 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गया है। फेड का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती बनी हुई है और वैश्विक स्तर पर आर्थिक परिस्थितियों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक 15 और 16 सितंबर को हुई। बैठक से पहले बाजार में 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही थी। केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दर में बढ़ोतरी का प्रमुख उद्देश्य महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना है। अमेरिका में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव का असर महंगाई पर पड़ रहा है। मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
फेड के फैसले का असर केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव दुनिया के अन्य वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने से निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां पहले की तुलना में अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इसका असर उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर पड़ने की संभावना रहती है। भारत भी इस वैश्विक वित्तीय बदलाव से प्रभावित हो सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में फेड के फैसले के बाद निवेशकों की नजर विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि वैश्विक निवेशक अमेरिकी बाजारों में अधिक निवेश की ओर बढ़ते हैं, तो भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। वहीं रुपये की चाल पर भी अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की मांग का प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि बाजार की वास्तविक प्रतिक्रिया कई अन्य घरेलू और वैश्विक आर्थिक कारकों पर भी निर्भर करेगी।
फेड के फैसले के बीच भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण रहेंगी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी का असर आयात लागत और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। महंगाई, रुपये की विनिमय दर, विदेशी निवेश और शेयर बाजार जैसे प्रमुख संकेतकों पर आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
कुल मिलाकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। भारत में आज शेयर बाजार, रुपया और विदेशी निवेश से जुड़े संकेतकों में इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।