नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत खारिज, DNA रिपोर्ट में जैविक पिता होने की पुष्टि

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी छोटू यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने पीड़िता के बयान, गर्भावस्था से जुड़े चिकित्सकीय साक्ष्य और DNA रिपोर्ट को प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण माना। DNA जांच में आरोपी को पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता बताया गया। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया।

Sep 17, 2026 - 08:01
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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत खारिज, DNA रिपोर्ट में जैविक पिता होने की पुष्टि

UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी छोटू यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले में पीड़िता के बयान, गर्भावस्था से संबंधित चिकित्सकीय साक्ष्य और DNA जांच रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, DNA जांच में आरोपी को पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता बताया गया है। हाईकोर्ट के समक्ष जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों को आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया आधार बताया था। अदालत ने उपलब्ध सामग्री को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।

मामला कोरबा जिले के अजाक थाने में दर्ज प्रकरण से संबंधित है। आरोपी के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(V) के तहत मामला दर्ज किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अभियोजन का आरोप है कि नाबालिग को शादी का भरोसा देकर उसके साथ यौन अपराध किया गया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया और ट्रायल कोर्ट में आरोप तय किए गए।

अभियोजन के अनुसार, घटना की शुरुआत मई 2025 में हुई। पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट में बताया था कि परिवार के जंगल जाने के दौरान उनकी बेटी घर पर अकेली थी। परिवार के वापस लौटने पर वह घर पर नहीं मिली। कुछ दिन बाद पीड़िता वापस घर पहुंची और उसके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। जांच के दौरान पीड़िता के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई और मामले में चिकित्सकीय जांच कराई गई।

ट्रायल कोर्ट में पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने आरोपी पर गंभीर आरोप लगाए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को शादी का भरोसा दिया था। बाद में उसकी गर्भावस्था की जानकारी सामने आई और बच्चे का जन्म हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, जन्म के करीब एक सप्ताह बाद बच्चे की मृत्यु हो गई। मामले की जांच के दौरान बच्चे और आरोपी से संबंधित DNA परीक्षण कराया गया, जिसकी रिपोर्ट को हाईकोर्ट के समक्ष भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में रखा गया।

हाईकोर्ट ने जमानत पर विचार करते हुए कहा कि मामले में उपलब्ध सामग्री को इस स्तर पर पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत के समक्ष पीड़िता के बयान के साथ गर्भावस्था से जुड़े चिकित्सकीय साक्ष्य और DNA रिपोर्ट भी मौजूद थी। DNA रिपोर्ट में आरोपी को बच्चे का जैविक पिता बताया गया है। इससे अभियोजन की ओर से लगाए गए संबंध संबंधी आरोपों को प्रथम दृष्टया समर्थन मिलने की बात अदालत के समक्ष रखी गई।

बचाव पक्ष की ओर से आरोपी ने पीड़िता के साथ संबंधों को अलग तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की। आरोपी की ओर से यह तर्क दिया गया कि दोनों के बीच आपसी संबंध थे और पीड़िता उसके साथ अलग-अलग स्थानों पर गई थी। पीड़िता की उम्र को लेकर भी बचाव पक्ष की ओर से सवाल उठाए गए। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर घटना के समय पीड़िता के नाबालिग होने की स्थिति को ध्यान में रखा और जमानत आवेदन पर राहत नहीं दी।

इस मामले में हाईकोर्ट का आदेश जमानत आवेदन तक सीमित है। जमानत खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि ट्रायल के स्तर पर अंतिम दोषसिद्धि हो गई है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्णय संबंधित ट्रायल कोर्ट द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। हाईकोर्ट ने फिलहाल जमानत के प्रश्न पर उपलब्ध प्रथम दृष्टया सामग्री को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार किया है।