UPI Payment Charges: विदेशी दबाव के आरोपों पर सरकार का जवाब, कहा- UPI शुल्क का फैसला भारत की अपनी नीति

₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने के फैसले को लेकर विपक्ष के विदेशी दबाव के आरोपों पर वित्त मंत्रालय ने जवाब दिया है। सरकार ने कहा कि यह निर्णय किसी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार P2P UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे और ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी शुल्क-मुक्त होंगे। करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट लेन-देन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।

Sep 16, 2026 - 16:48
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UPI Payment Charges: विदेशी दबाव के आरोपों पर सरकार का जवाब, कहा- UPI शुल्क का फैसला भारत की अपनी नीति

UNITED NEWS OF ASIA. ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने के फैसले को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेताओं ने इस फैसले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और इसे विदेशी दबाव से जोड़ने वाले आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के जवाब में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि UPI से जुड़े नीतिगत फैसले भारत की अपनी नीति और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। सरकार ने विदेशी दबाव की बात को खारिज किया है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक नया UPI फ्रेमवर्क किसी विदेशी दबाव का परिणाम नहीं है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ, सुरक्षित, समावेशी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाए रखना है। मंत्रालय ने अगस्त 2026 में भी कहा था कि Payment and Settlement Systems Act में किए गए बदलाव का उद्देश्य UPI की दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी विकास और उभरते जोखिमों से सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि नए नियमों के बावजूद आम लोगों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन पर किसी भी राशि के लिए MDR नहीं लगाया जाएगा। इसी तरह ₹2,000 तक के Person-to-Merchant (P2M) भुगतान भी शुल्क-मुक्त रहेंगे। वित्त मंत्रालय के अनुसार करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेन-देन नए MDR प्रावधान से प्रभावित नहीं होंगे।

नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के निर्धारित P2M लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाएगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। MDR भुगतान इकोसिस्टम के भीतर बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप से जुड़े प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा।

छोटे व्यापारियों को भी नए फ्रेमवर्क में सुरक्षा दी गई है। UPI QR के जरिए प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का बोझ नहीं पड़ने देना है।

कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था तय की गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के निर्धारित लेन-देन पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR और अधिकतम ₹300 की सीमा रखी गई है।

ग्राहकों के लिए भी सरकार ने कुछ सुरक्षा प्रावधान बताए हैं। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहकों पर न डालें। साथ ही UPI ऐप प्रदाताओं को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने से रोकने का प्रावधान रखा गया है। इसका मतलब है कि MDR की व्यवस्था मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लागू होगी, इसे सीधे ग्राहक पर लगाने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार के अनुसार UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए भुगतान व्यवस्था के लिए एक व्यवहार्य राजस्व मॉडल जरूरी है। मंत्रालय का कहना है कि बड़े मर्चेंट लेन-देन से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल भुगतान बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सुरक्षा और तकनीकी क्षमता बढ़ाने तथा छोटे कारोबारियों के बीच UPI के विस्तार में किया जा सकता है। कुल MDR संग्रह का 5 प्रतिशत छोटे व्यापारियों के बीच UPI को बढ़ावा देने के लिए बनाए जाने वाले विशेष फंड में देने का भी प्रावधान बताया गया है।

इस तरह UPI शुल्क को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच सरकार का आधिकारिक पक्ष यह है कि नया MDR किसी विदेशी दबाव में लागू नहीं किया गया है। वहीं विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार की नीति और उसके प्रभाव पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल सरकारी नियमों के अनुसार P2P भुगतान मुफ्त रहेंगे और ₹2,000 तक के अधिकांश मर्चेंट भुगतान तथा छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित शून्य-MDR व्यवस्था भी जारी रहेगी।