कर्नाटक में कांग्रेस विधायक की भतीजी पर सरकारी क्लीनिक से वेतन लेने का आरोप, PG की पढ़ाई के साथ ड्यूटी को लेकर जांच

कर्नाटक के बागलकोट में कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी डॉ. अंकिता यारगल पर नम्मा क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर रहते हुए पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई करने और ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के दौरान वेतन लेने के आरोपों की जांच चल रही है। जिला प्रशासन ने उन्हें सेवा से हटा दिया है और 18 सितंबर को जांच के लिए पेश होने का नोटिस दिया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होने पर वेतन की वसूली और अन्य कार्रवाई हो सकती है।

Sep 16, 2026 - 15:57
 0  2
कर्नाटक में कांग्रेस विधायक की भतीजी पर सरकारी क्लीनिक से वेतन लेने का आरोप, PG की पढ़ाई के साथ ड्यूटी को लेकर जांच

UNITED NEWS OF ASIA. कर्नाटक के बागलकोट में नम्मा क्लीनिक की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यारगल को लेकर सरकारी वेतन और ड्यूटी से अनुपस्थिति का मामला सामने आया है। डॉ. अंकिता यारगल बागलकोट से कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार यारगल की बेटी हैं। उन पर आरोप है कि वह नम्मा क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर रहते हुए एक निजी मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट कोर्स कर रही थीं और इसी दौरान सरकारी सेवा से जुड़ा वेतन भी प्राप्त कर रही थीं। मामले में जिला प्रशासन की ओर से जांच शुरू की गई है।

मीडिया रिपोर्टों और प्रशासनिक नोटिस के अनुसार, डॉ. अंकिता को बागलकोट के वंबे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने मार्च 2026 में निजी मेडिकल कॉलेज में MD पाठ्यक्रम शुरू किया। इसी दौरान उनके क्लीनिक की ड्यूटी से अनुपस्थित रहने को लेकर शिकायतें सामने आईं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन बाले की ओर से जारी नोटिस में आरोप लगाया गया कि वह 3 मार्च से सितंबर तक क्लीनिक में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहीं। हालांकि वेतन और उपस्थिति को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण सामने आए हैं, इसलिए अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. अंकिता को करीब 75 हजार रुपये मासिक वेतन मिलने की बात सामने आई है। स्थानीय कार्यकर्ता राजू नाइक ने आरोप लगाया कि वह क्लीनिक में नियमित रूप से नहीं आती थीं और उनकी जगह नर्सों द्वारा मरीजों की देखभाल की जा रही थी। हालांकि, डॉ. अंकिता की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। उनके पिता डॉ. राजकुमार यारगल ने कहा कि उनकी बेटी की नियुक्ति उनके कार्यभार संभालने से पहले तत्कालीन जिला स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यकाल में हुई थी और उन्होंने स्वयं उनके वेतन का भुगतान जारी नहीं किया।

मामला सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार यारगल ने डॉ. अंकिता को सेवा से हटाने का निर्देश दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आदेश में यह भी कहा गया कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचित किए बिना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स शुरू किया था। सरकारी सेवा के दौरान किसी अन्य पूर्णकालिक शैक्षणिक कार्यक्रम में शामिल होने और नियमित ड्यूटी नहीं करने को लेकर प्रशासन ने नियमों के संभावित उल्लंघन की जांच शुरू की है।

मामले की जांच के लिए बागलकोट जिला पंचायत के CEO गजानन बाले ने सुनवाई निर्धारित की थी। रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर को हुई पहली सुनवाई में डॉ. अंकिता उपस्थित नहीं हुईं। इसके बाद उन्हें 18 सितंबर को सुबह 10 बजे जिला पंचायत कार्यालय के कमरा नंबर 11 में दस्तावेजों के साथ पेश होने का नोटिस दिया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई में भी अनुपस्थित रहने पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा निर्णय लिया जा सकता है।

जांच में यदि ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति और नियमों के उल्लंघन के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नियमों के अनुसार वेतन या मानदेय की वसूली के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने मामले को पेशेवर आचरण से भी जोड़ा है और जरूरत पड़ने पर कर्नाटक मेडिकल काउंसिल तथा नेशनल मेडिकल कमीशन को जानकारी भेजे जाने की बात कही है। फिलहाल मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।