पश्चिम बंगाल में TMC के 10 बागी विधायकों को नोटिस, अयोग्यता याचिका पर 7 दिन में मांगा जवाब

पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने ऋतब्रता बनर्जी समेत TMC के 10 विधायकों को अयोग्यता याचिका पर नोटिस जारी किया है। सभी से सात दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। यह कार्रवाई ममता बनर्जी गुट की ओर से दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता समाप्त करने की मांग के बाद हुई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट में भी संबंधित विवाद चल रहा है।

Sep 16, 2026 - 15:29
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पश्चिम बंगाल में TMC के 10 बागी विधायकों को नोटिस, अयोग्यता याचिका पर 7 दिन में मांगा जवाब

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा राजनीतिक और संगठनात्मक विवाद अब विधानसभा की औपचारिक कार्यवाही तक पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट से जुड़े 10 विधायकों को अयोग्यता याचिका के संबंध में नोटिस जारी किया है। विधानसभा की ओर से इन विधायकों से सात दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। नोटिस दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता समाप्त करने की मांग से जुड़ी शिकायतों के आधार पर जारी किए गए हैं। 

जिन विधायकों को नोटिस भेजा गया है, उनमें विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रता बनर्जी के अलावा अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं। विधानसभा सूत्रों के मुताबिक सभी संबंधित विधायकों को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिनों की समय-सीमा दी गई है। अखरुज्जमान अंसारी ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले पर पार्टी के भीतर चर्चा के बाद समय पर जवाब दिया जाएगा।

यह कार्रवाई TMC के भीतर चल रहे नेतृत्व और संगठनात्मक विवाद की पृष्ठभूमि में हुई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से इन 10 विधायकों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। वरिष्ठ TMC विधायक सोवन्देब चट्टोपाध्याय ने 7 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रथिन बोस को पत्र लिखकर इन विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि संबंधित विधायकों ने पार्टी के हितों के खिलाफ गतिविधियां कीं। इन आरोपों पर अब विधायकों से जवाब मांगा गया है।

विधानसभा सचिवालय की ओर से नोटिस जारी होने से पहले इस मामले ने न्यायिक स्तर पर भी नया मोड़ लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, नोटिस जारी होने से एक दिन पहले सोवन्देब चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए ऋतब्रता बनर्जी और अन्य नौ विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भी विवाद कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है। सोवन्देब चट्टोपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से ऋतब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने को चुनौती दी है।

TMC का आंतरिक विवाद केवल विधानसभा और अदालत तक सीमित नहीं है। पार्टी के नाम, संगठनात्मक नियंत्रण और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच चुनाव आयोग के समक्ष भी प्रक्रिया चल रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से दस्तावेज और दावे लिए हैं। यह विवाद ऐसे समय में चल रहा है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव प्रस्तावित हैं।

वहीं, ऋतब्रता गुट ने अयोग्यता की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। इस गुट की ओर से नोटिस को विधानसभा में दलबदल संबंधी शिकायत के बाद अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। ऐसे में अब सभी 10 विधायकों के जवाब के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल नोटिस जारी होना सदस्यता समाप्त होने का अंतिम निर्णय नहीं है, बल्कि संबंधित विधायकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। मामले की आगे की कार्रवाई विधानसभा की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत होगी।