EPFO के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार EPF Scheme, 1952 के तहत कवरेज के लिए मौजूदा वेतन सीमा 15 हजार रुपये प्रति माह है। सरकार ने इससे पहले सितंबर 2014 में EPF/EPS से जुड़ी वेतन सीमा को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया था। EPFO की वार्षिक रिपोर्ट में भी सितंबर 2014 से 15 हजार रुपये की सीमा लागू होने का उल्लेख है।
यदि 25 हजार रुपये की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इससे उन कर्मचारियों की संख्या बढ़ सकती है जो EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज के दायरे में आएंगे। इसका उद्देश्य औपचारिक क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना हो सकता है। हालांकि, नई सीमा लागू होने पर कर्मचारियों और नियोक्ताओं के योगदान, मौजूदा सदस्यों पर इसके प्रभाव तथा EPS से जुड़े वित्तीय दायित्व जैसे पहलुओं को अंतिम नियमों में स्पष्ट किया जाएगा।
EPF कर्मचारियों के लिए दीर्घकालिक बचत और सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से निर्धारित योगदान के जरिए EPF खाते में राशि जमा होती है। EPS के तहत पात्र कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ी व्यवस्था भी संचालित होती है। सरकार समय-समय पर इन योजनाओं में बदलाव करती रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार सितंबर 2014 में वेतन सीमा बढ़ाने के साथ EPS से संबंधित कई प्रावधानों में भी बदलाव किए गए थे।
वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब सरकार औपचारिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के जरिए नए रोजगार को बढ़ावा देने और EPFO के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी पहल की गई है। इस योजना के तहत पात्र पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों को निर्धारित शर्तों के अनुसार अधिकतम 15 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
EPF वेतन सीमा में बदलाव होने की स्थिति में कर्मचारियों के लिए इसके व्यावहारिक प्रभाव महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, केवल कवरेज की सीमा बढ़ने से यह स्वतः तय नहीं होता कि हर कर्मचारी या नियोक्ता का वास्तविक योगदान किस राशि तक बढ़ेगा। इसके लिए सरकार और EPFO की ओर से जारी होने वाले अंतिम नियम और अधिसूचना महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल 15 हजार रुपये की मौजूदा सीमा आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू है। 25 हजार रुपये की प्रस्तावित सीमा को लेकर अंतिम स्थिति कैबिनेट के निर्णय और उसके बाद जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना से स्पष्ट होगी। इसलिए कर्मचारियों को किसी भी बदलाव को अंतिम मानने से पहले EPFO या श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना चाहिए।