जानकारी के मुताबिक, हेमंत सिंह और गिरिराज सिंह की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश दिया। इससे पहले दतिया की निचली अदालत में विवादित संपत्तियों के संबंध में अंतरिम राहत की मांग की गई थी, लेकिन मार्च 2026 में अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई।
यह संपत्ति विवाद नया नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजपरिवार की संपत्तियों के अधिकार और हिस्सेदारी को लेकर 14 नवंबर 2019 को दीवानी वाद शुरू हुआ था। इसके बाद 23 जून 2022 को विवादित संपत्तियों के संबंध में अंतरिम रोक लगाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। मामले में पक्षकारों के बीच संपत्तियों के अधिकार, हिस्सेदारी और हस्तांतरण को लेकर दावे किए जाते रहे हैं। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विवादित संपत्तियों की स्थिति पर अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विवाद में दतिया और सेंवढ़ा के ऐतिहासिक किलों का भी उल्लेख है। वर्ष 2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दतिया राजपरिवार की संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद में दतिया किले और सेंवढ़ा स्थित किले तथा अन्य कृषि संपत्तियों का जिक्र किया गया था। उस समय भी राजपरिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के अधिकार और बंटवारे को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे। हालांकि, इन संपत्तियों पर अंतिम मालिकाना हक का निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
हाईकोर्ट के मौजूदा आदेश का प्रमुख प्रभाव यह है कि विवादित संपत्तियों को मामले की सुनवाई के दौरान तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करने या उनकी खरीद-फरोख्त करने पर रोक रहेगी। इससे संपत्तियों की मौजूदा स्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी और मामले में अंतिम अधिकार तय होने तक संपत्तियों के हस्तांतरण को लेकर नई जटिलता पैदा नहीं होगी।
इस विवाद में दतिया के अलावा ग्वालियर से जुड़ी संपत्तियों और पैतृक संपत्तियों पर किए गए दावों का भी उल्लेख सामने आया है। ऐसे में हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि विवादित संपत्तियों के अधिकार, हिस्सेदारी और उनके हस्तांतरण को लेकर पक्षकारों के दावों पर अदालत किस तरह विचार करती है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने केवल विवादित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण पर रोक लगाई है। संपत्तियों का अंतिम मालिकाना हक किसके पक्ष में जाएगा, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। मामले की आगे होने वाली सुनवाई में दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर विवाद के अन्य पहलुओं पर विचार किया जाएगा।