इससे पहले Meta ने बताया था कि जब उसे बच्चों के संभावित शोषण से संबंधित सामग्री की जानकारी मिलती है, तो वह लागू कानूनों के अनुसार अमेरिका स्थित National Center for Missing & Exploited Children यानी NCMEC को रिपोर्ट करती है। Meta के मुताबिक भारत में ऐसी रिपोर्टिंग NCMEC के माध्यम से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल तक भी पहुंचती थी। अब सरकार की मांग के बाद भारतीय एजेंसियों को सीधे रिपोर्टिंग की व्यवस्था को लेकर कंपनी ने सहमति जताई है।
यह मामला जुलाई 2026 में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद गंभीर हुआ था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि Instagram पर कुछ पेड विज्ञापनों के जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच बनाई जा रही थी और कुछ विज्ञापन यूजर्स को दूसरे ऑनलाइन चैनलों की ओर निर्देशित कर रहे थे। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Meta को ऐसे विज्ञापनों और सामग्री को तत्काल हटाने तथा पूरे मामले पर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया था।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी NCPCR ने भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। आयोग ने 3 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। Meta की ओर से जवाब मिलने के बाद आयोग ने मामले की औपचारिक जांच शुरू की और 9 सितंबर को Meta India के वरिष्ठ अधिकारियों को आयोग के सामने पेश होने के लिए बुलाया। अधिकारियों की पेशी के दौरान मामले से जुड़े सवालों पर चर्चा हुई, हालांकि पूछताछ की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
सरकार की चिंता केवल आपत्तिजनक सामग्री हटाने तक सीमित नहीं है। उसका जोर ऐसे मामलों की पहचान होने के बाद भारतीय कानून के तहत समय पर रिपोर्टिंग और कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत करने पर है। रिपोर्टों के अनुसार, Meta के साथ हुई बातचीत में भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सीधे जानकारी उपलब्ध कराने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। इससे संबंधित मामलों में जांच एजेंसियों तक सूचना पहुंचने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सीधी हो सकती है।
Meta ने भारत में अपने enforcement action को लेकर भी जानकारी दी है। कंपनी ने जुलाई में कहा था कि उसने पिछले छह महीनों के दौरान भारत में करीब 1.6 लाख ऐसे अकाउंट्स पर कार्रवाई की थी, जो उसकी सुरक्षा नीतियों का उल्लंघन कर रहे थे। कंपनी का कहना है कि वह बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है और सरकार के साथ मिलकर ऑनलाइन शोषण से जुड़े मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और आपत्तिजनक सामग्री की पहचान को लेकर बातचीत कर रही है। NCPCR की जांच और सरकारी निगरानी के चलते सोशल मीडिया कंपनियों की रिपोर्टिंग व्यवस्था भी चर्चा के केंद्र में है। फिलहाल Meta की भारतीय एजेंसियों को सीधे रिपोर्टिंग की सहमति को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जबकि संबंधित जांच और नियामकीय प्रक्रिया आगे जारी है।