₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर MDR को लेकर सियासी घमासान, राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI लेनदेन पर 15 अक्टूबर 2026 से 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने की घोषणा के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस व्यवस्था का असर अंततः ग्राहकों पर पड़ सकता है और इसे अमेरिकी दबाव से जोड़ा। केंद्र सरकार का कहना है कि आम ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे l

Sep 16, 2026 - 10:32
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₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर MDR को लेकर सियासी घमासान, राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

UNITED NEWS OF ASIA. भारत में डिजिटल पेमेंट के सबसे बड़े माध्यमों में शामिल UPI को लेकर 15 अक्टूबर 2026 से नई MDR व्यवस्था लागू होने जा रही है। National Payments Corporation of India (NPCI) के अनुसार ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate लगाया जाएगा। यह शुल्क ग्राहक से सीधे लेने के बजाय संबंधित मर्चेंट पर लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के सामान्य मर्चेंट लेनदेन में MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। वहीं कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था निर्धारित की गई है।

इस बदलाव के बाद UPI को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार की इस व्यवस्था पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार ने ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR लगाने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने कहा कि संख्या के लिहाज से ऐसे लेनदेन सीमित हो सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार UPI के कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी काफी अधिक है। राहुल गांधी ने यह भी तर्क दिया कि अगर दुकानदारों पर शुल्क लगाया जाता है तो उसका असर भविष्य में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से ग्राहकों पर पड़ सकता है।

राहुल गांधी ने अपने बयान में इस नीति को अमेरिकी भुगतान कंपनियों के कथित दबाव से भी जोड़ा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव के सामने झुकने का आरोप लगाया। यह राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीतिक व्याख्या है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस कथित अमेरिकी दबाव और नई MDR व्यवस्था के बीच कोई सार्वजनिक दस्तावेजी संबंध स्थापित नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने UPI व्यवस्था में बदलाव का तर्क डिजिटल भुगतान प्रणाली के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और लंबे समय तक टिकाऊ संचालन की जरूरत से जोड़ा है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला UPI भुगतान पूरी तरह निशुल्क रहेगा, चाहे भुगतान की राशि कितनी भी हो। इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगेगा। छोटे मर्चेंट के लिए निर्धारित जीरो-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। वित्त मंत्रालय के अनुसार इन प्रावधानों के कारण लगभग 96 प्रतिशत P2M UPI लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR सरकार या NPCI द्वारा टैक्स के रूप में वसूला जाने वाला पैसा नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े हिस्सेदारों के बीच वितरित किया जाता है।

नई व्यवस्था में कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क का प्रावधान भी बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार रेलवे, ईंधन, दूरसंचार, बीमा और कुछ अन्य निर्दिष्ट श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर प्रति लेनदेन ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा। सामान्य मर्चेंट लेनदेन में 0.4 प्रतिशत की दर और अधिकतम ₹300 की सीमा रखी गई है। छोटे QR-आधारित व्यापारियों को भी निर्धारित पात्रता के आधार पर राहत दी गई है।

इस मुद्दे पर मुख्य विवाद फिलहाल इसी सवाल को लेकर है कि मर्चेंट पर लगने वाले MDR का बाजार में अंतिम असर क्या होगा। सरकार का कहना है कि ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। वहीं राहुल गांधी और कांग्रेस का तर्क है कि मर्चेंट पर बढ़ी लागत अप्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल हो सकती है। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने के बाद इसके वास्तविक व्यावसायिक और उपभोक्ता प्रभाव को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।