कबीरधाम में मां दन्तेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह को 10 साल का तालाब पट्टा, मत्स्य पालन से बढ़ेगी आजीविका

कबीरधाम जिले के बोड़ला जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बांटीपथरा की मां दन्तेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह को शासकीय तालाब 10 वर्षों के लिए मत्स्य पालन हेतु पट्टे पर दिया गया है। कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने समूह की महिलाओं को अनुमति पत्र सौंपा। इस पहल से महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलने के साथ ग्रामीण आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Sep 16, 2026 - 11:05
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कबीरधाम में मां दन्तेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह को 10 साल का तालाब पट्टा, मत्स्य पालन से बढ़ेगी आजीविका

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बोड़ला जनपद पंचायत के ग्राम बांटीपथरा की मां दन्तेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह को शासकीय तालाब 10 वर्षों के लिए मत्स्य पालन हेतु पट्टे पर प्रदान किया गया है। कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने समूह की महिलाओं को अनुमति पत्र सौंपा। इस पहल से समूह की महिलाओं को मत्स्य पालन के माध्यम से स्वरोजगार और आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। शासकीय तालाबों को मत्स्य पालन के लिए समूहों को पट्टे पर देना ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने का एक माध्यम है।

तालाब का 10 वर्षीय पट्टा मिलने से मां दन्तेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं अब मत्स्य पालन की गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित कर सकेंगी। समूह के स्तर पर तालाब के प्रबंधन से लेकर मछली उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। इससे उन्हें सामूहिक रूप से काम करने, उत्पादन की योजना बनाने और मत्स्य पालन से होने वाली आय को समूह की आजीविका से जोड़ने का अवसर मिलेगा। महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव में ही स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध होगा। मत्स्य पालन के माध्यम से समूह की महिलाएं नियमित रूप से आर्थिक गतिविधि से जुड़ सकेंगी। इससे परिवार की आय में सहयोग मिलने के साथ महिलाओं में आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों को मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से जोड़ने के उदाहरणों में महिलाओं ने सामूहिक रूप से तालाब प्रबंधन और मछली उत्पादन को आजीविका के साधन के रूप में अपनाया है।

समूह को तालाब आवंटन की प्रक्रिया छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग के मछलीपालन संबंधी दिशा-निर्देशों और छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत की गई है। इससे तालाब के उपयोग और मत्स्य पालन गतिविधियों को निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित करने का आधार तैयार हुआ है। मत्स्य निरीक्षक निलेश चंद्रवंशी द्वारा आवश्यक कागजी कार्रवाई और प्रक्रिया पूरी की गई।

कलेक्टर तुलिका प्रजापति द्वारा समूह की महिलाओं को अनुमति पत्र सौंपे जाने के बाद अब समूह के सामने तालाब में मत्स्य पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। इसके तहत उत्पादन, तालाब प्रबंधन और विपणन से जुड़ी गतिविधियों में समूह की महिलाओं की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर तुलिका प्रजापति को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है।

मां दन्तेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह को मिला यह 10 वर्षीय तालाब पट्टा ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का नया अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कदम है। मत्स्य पालन से होने वाली आय के माध्यम से समूह की महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ परिवार की जरूरतों में भी योगदान दे सकेंगी। वहीं सामूहिक रूप से संचालित होने वाली यह गतिविधि गांव में महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक भूमिका को और मजबूत करने में मदद कर सकती है।