महंगाई का जोरदार झटका: खुदरा महंगाई 4.82% और थोक महंगाई 9.92% पहुंची, प्याज-लहसुन के दाम बढ़े

अगस्त 2026 में देश में खुदरा और थोक दोनों महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। खुदरा महंगाई दर जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जबकि थोक महंगाई दर 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत रही। प्याज और लहसुन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई, जबकि टमाटर और आलू के दाम में राहत देखने को मिली। फ्यूल एंड पावर सेक्टर की महंगाई भी बढ़कर 22.93 प्रतिशत हो गई।

Sep 15, 2026 - 10:26
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महंगाई का जोरदार झटका: खुदरा महंगाई 4.82% और थोक महंगाई 9.92% पहुंची, प्याज-लहसुन के दाम बढ़े

UNITED NEWS OF ASIA. देश में महंगाई के मोर्चे पर अगस्त 2026 के आंकड़ों ने चिंता बढ़ाई है। खुदरा महंगाई के साथ-साथ थोक महंगाई दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। वहीं थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI आधारित महंगाई दर अगस्त में 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी का असर भी महंगाई के आंकड़ों पर दिखाई दिया है।

खुदरा महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में खाद्य महंगाई दर 5.95 प्रतिशत रही। यह महंगाई आम लोगों के रोजमर्रा के खर्च पर सीधा असर डाल सकती है। सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अलग-अलग स्तर पर बदलाव देखने को मिला। खास तौर पर प्याज और लहसुन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त में प्याज की महंगाई दर 48.27 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 22.54 प्रतिशत थी। इसी तरह लहसुन की महंगाई जुलाई के 35.36 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 43.60 प्रतिशत हो गई।

हालांकि सभी सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई। अगस्त में अदरक की महंगाई दर जुलाई के 83.57 प्रतिशत से घटकर 73.82 प्रतिशत रही। टमाटर की कीमतों में भी पिछले साल की तुलना में राहत देखने को मिली और अगस्त में इसकी कीमतों में 31.09 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आलू की कीमतों में भी सालाना आधार पर 13.14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि खाद्य वस्तुओं के बीच कीमतों का दबाव अलग-अलग रहा।

थोक महंगाई के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय तेजी दिखाई दी। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई जुलाई के 8.52 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 7.76 प्रतिशत रही, लेकिन थोक खाद्य महंगाई जुलाई के 6.65 प्रतिशत से बढ़कर 7.05 प्रतिशत हो गई। फ्यूल एंड पावर सेक्टर ने थोक महंगाई बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस क्षेत्र की महंगाई जुलाई के 20.05 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत हो गई। इससे परिवहन और उत्पादन लागत पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी महंगाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई जुलाई के 8.29 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 8.37 प्रतिशत हो गई। साल की शुरुआत में थोक महंगाई अपेक्षाकृत कम स्तर पर थी। मार्च 2026 में WPI महंगाई 3.98 प्रतिशत थी, जो अप्रैल में 8.36 प्रतिशत, मई में 9.88 प्रतिशत और जून में 9.97 प्रतिशत तक पहुंची। अगस्त में यह 9.92 प्रतिशत रही। इस तेज बदलाव में बेस इफेक्ट समेत कई कारकों की भूमिका मानी जा रही है।

खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में यह 2.75 प्रतिशत, फरवरी में 3.21 प्रतिशत, मार्च में 3.40 प्रतिशत, अप्रैल में 3.48 प्रतिशत, मई में 3.93 प्रतिशत, जून में 4.38 प्रतिशत, जुलाई में 4.45 प्रतिशत और अगस्त में 4.82 प्रतिशत रही। इस तरह लगातार कई महीनों से खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य महंगाई को 4 प्रतिशत के आसपास रखने का है, जबकि सरकार ने केंद्रीय बैंक को इसे 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत CPI महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। महंगाई के रुझान पर आगे खाद्य, ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।