लद्दाख में भारतीय सीमा के भीतर मोबाइल पर दिखने लगा चीन का समय, बाइकर्स का वीडियो वायरल
लद्दाख में घूमने गए बाइकर्स के एक समूह ने दावा किया है कि भारतीय सीमा में मौजूद होने के बावजूद उनके मोबाइल फोन में अचानक चीन का टाइम जोन दिखाई देने लगा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. लद्दाख में घूमने गए बाइकर्स के एक समूह के साथ हुई एक अनोखी घटना इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। बाइकर्स का दावा है कि वे भारतीय सीमा के भीतर मौजूद थे, लेकिन उनके मोबाइल फोन में अचानक चीन का समय (बीजिंग टाइम) दिखाई देने लगा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में बाइकर्स अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन दिखाते हुए बताते हैं कि वे भारत की जमीन पर खड़े हैं, लेकिन उनके फोन में समय भारतीय समय के बजाय चीन के टाइम जोन के अनुसार प्रदर्शित हो रहा है। भारत और चीन के समय में लगभग ढाई घंटे का अंतर है। ऐसे में फोन में समय बदलते देख बाइकर्स भी हैरान रह गए।
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे तकनीकी गड़बड़ी मान रहे हैं, जबकि कुछ ने इसे सीमा क्षेत्रों में संचार नेटवर्क से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्मार्टफोन में "ऑटोमेटिक टाइम जोन" नामक सुविधा होती है। यह फीचर मोबाइल नेटवर्क से प्राप्त सिग्नल के आधार पर स्थानीय समय को स्वतः अपडेट करता है। यदि फोन किसी विदेशी नेटवर्क के सिग्नल को पकड़ लेता है, तो समय भी उसी देश के टाइम जोन के अनुसार बदल सकता है।
रक्षा और सीमा मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित कई क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। लद्दाख के कुछ इलाके वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बेहद करीब हैं। चीन ने सीमा के निकट अपने दूरसंचार ढांचे को मजबूत किया है और कई स्थानों पर उच्च क्षमता वाले मोबाइल टावर स्थापित किए हैं।
इन टावरों के सिग्नल कई बार भारतीय क्षेत्र तक पहुंच जाते हैं, जिसके कारण मोबाइल फोन विदेशी नेटवर्क को पहचान लेते हैं। ऐसी स्थिति में फोन का समय, नेटवर्क नाम या अन्य सेटिंग्स स्वतः बदल सकती हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं होता कि उपयोगकर्ता किसी दूसरे देश की सीमा में प्रवेश कर गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुख्य रूप से नेटवर्क कवरेज और मोबाइल सेटिंग्स से जुड़ा तकनीकी मामला है। यदि उपयोगकर्ता अपने फोन में ऑटोमेटिक टाइम जोन विकल्प बंद कर मैन्युअल रूप से भारतीय समय निर्धारित कर दे, तो ऐसी समस्या से बचा जा सकता है।
फिलहाल वायरल वीडियो ने लोगों का ध्यान सीमा क्षेत्रों में नेटवर्क प्रभाव और तकनीकी चुनौतियों की ओर आकर्षित किया है। वहीं इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर बहस और चर्चा का दौर जारी है।