4 माह के जुड़वा बच्चों की हत्या मामले में मां को दोहरा आजीवन कारावास, पिता को साक्ष्य छिपाने पर 3-3 साल की सजा

रतलाम के बहुचर्चित जुड़वा शिशु हत्या मामले में अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने मां पम्मी उर्फ मुस्कान को दोहरे हत्या के अपराध में दोहरा आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं बच्चों के पिता आमिर कुरैशी को साक्ष्य छिपाने का दोषी मानते हुए 3-3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई। न्यायालय का यह फैसला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सुनाया गया।

Aug 1, 2026 - 11:29
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4 माह के जुड़वा बच्चों की हत्या मामले में मां को दोहरा आजीवन कारावास, पिता को साक्ष्य छिपाने पर 3-3 साल की सजा

UNITED NEWS OF ASIA. राजेश पुरोहित, रतलाम l मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के बहुचर्चित जुड़वा शिशु हत्या प्रकरण में अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया की अदालत ने चार माह के जुड़वा बच्चों की हत्या के मामले में मां पम्मी उर्फ मुस्कान को दोषी ठहराते हुए दोहरे आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं बच्चों के पिता आमिर कुरैशी को साक्ष्य छिपाने का दोषी मानते हुए 3-3 वर्ष के कठोर कारावास तथा 2 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

अभियोजन के अनुसार 20 नवंबर 2024 को इरशाद कुरैशी ने थाना माणक चौक में सूचना दी थी कि वेदव्यास कॉलोनी स्थित किराए के मकान में रहने वाले आमिर कुरैशी और उसकी पत्नी मुस्कान के चार माह के जुड़वा बच्चे हसन और फातिमा पानी की सिंटेक्स टंकी में मृत पाए गए हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान तहसीलदार की मौजूदगी में दोनों बच्चों के शव कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों बच्चों की मौत पानी में डूबने से होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच की और परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्र किए।

अभियोजन के अनुसार घटना से एक दिन पहले परिवार में शोक होने के कारण आमिर कुरैशी और उसकी मां रिश्तेदारी में चले गए थे। बताया गया कि मुस्कान ने पति से घर पर रुकने का आग्रह किया था, लेकिन उसकी बात नहीं मानी गई। अभियोजन का आरोप था कि इसी बात से नाराज होकर मुस्कान ने अपने चार माह के दोनों जुड़वा बच्चों को एक-एक कर सिंटेक्स की पानी की टंकी में डुबो दिया। बाद में उसने पति को फोन कर बच्चों के लापता होने की जानकारी दी।

जब आमिर कुरैशी अपने एक मित्र के साथ घर पहुंचा तो दोनों बच्चों को टंकी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। अभियोजन के अनुसार पुलिस को सूचना देने के बजाय दोनों बच्चों के शव शैरानीपुरा स्थित कब्रिस्तान में दफना दिए गए। इसी आधार पर न्यायालय ने आमिर कुरैशी को साक्ष्य छिपाने का दोषी माना।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 24 गवाह प्रस्तुत किए, जिनमें से 16 गवाह पक्षद्रोही हो गए। इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।

इस चर्चित प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने पैरवी की। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर मां को दोहरे हत्या के अपराध में दोहरा आजीवन कारावास तथा पिता को साक्ष्य छिपाने के अपराध में 3-3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।