रायपुर में नो फ्लैक्स जोन के नियमों पर सवाल, सड़कों और खंभों पर बैनर-फ्लैक्स की भरमार

रायपुर में नगर निगम द्वारा तय नो फ्लैक्स जोन के बावजूद कई प्रमुख मार्गों, बिजली के खंभों और भवनों पर पोस्टर-बैनर लगे नजर आ रहे हैं। इससे शहर की सुंदरता के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कार्रवाई में भेदभाव का आरोप लगाया है, जबकि निगम ने अवैध फ्लैक्स के खिलाफ कार्रवाई जारी होने की बात कही है।

Sep 15, 2026 - 16:26
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रायपुर में नो फ्लैक्स जोन के नियमों पर सवाल, सड़कों और खंभों पर बैनर-फ्लैक्स की भरमार

UNITED NEWS OF ASIA. राजधानी रायपुर में नगर निगम की ओर से नो फ्लैक्स जोन और निर्धारित स्थानों पर ही पोस्टर-बैनर लगाने के नियमों के बावजूद कई प्रमुख सड़कों, बिजली के खंभों और भवनों पर फ्लैक्स नजर आ रहे हैं। राजनीतिक बधाई संदेशों से लेकर व्यावसायिक विज्ञापन, धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों और सरकारी प्रचार से जुड़े पोस्टर-बैनर शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए हैं। स्थिति को लेकर नगर निगम की निगरानी और कार्रवाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसे फ्लैक्स उन मार्गों पर भी दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें नो फ्लैक्स जोन घोषित किया गया है।

नगर निगम की आउटडोर एडवरटाइजमेंट पॉलिसी के तहत बिना अनुमति, शुल्क या निर्धारित मापदंडों के विपरीत पोस्टर-बैनर लगाए जाने पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। शहर के 10 जोनों में पोस्टर और फ्लैक्स लगाने के लिए निर्धारित स्थान भी चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा छह प्रमुख मार्गों को नो फ्लैक्स जोन के दायरे में रखा गया है। इनमें महिला थाना से बूढ़ेश्वर मंदिर, तेलीबांधा थाना चौक से टाटीबंध, कोतवाली से जयस्तंभ चौक, सिविल लाइन तथा पचपेड़ी नाका से लालपुर ओवरब्रिज तक के मार्ग शामिल बताए गए हैं। कुछ स्थानों पर सरकारी फ्लैक्स को छूट दिए जाने की व्यवस्था भी बताई गई है।

जमीनी स्थिति को लेकर रिपोर्ट में बताया गया है कि महिला थाना से बूढ़ेश्वर मंदिर जाने वाले मार्ग पर बिजली के खंभों में कवि सम्मेलन और व्यावसायिक विज्ञापन से जुड़े फ्लैक्स लगे हुए दिखाई दिए। इसी तरह भगत सिंह चौक से टाटीबंध मार्ग पर नुआखाई, भागवत, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर और फिल्मों के प्रचार से जुड़े पोस्टर-बैनर नजर आने की बात सामने आई है। इससे सवाल उठ रहा है कि प्रतिबंधित मार्गों पर लगाए गए इन विज्ञापनों की नियमित निगरानी और समय पर हटाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

रायपुर के अन्य हिस्सों में भी सड़क किनारे और खंभों पर फ्लैक्स लगाए जाने की स्थिति सामने आई है। आकाशवाणी चौक से खजाना चौक के बीच सरकारी कार्यक्रमों से जुड़े फ्लैक्स सड़क के बीच लगाए जाने की बात कही गई है। वहीं मेकाहारा अस्पताल से भाजपा कार्यालय की ओर जाने वाले मार्ग पर नेताओं के जन्मदिन और बधाई संदेश वाले फ्लैक्स खंभों तथा सड़क किनारे दिखाई देने का उल्लेख है। तेज हवा और बारिश के दौरान ढीले या बड़े आकार के फ्लैक्स गिरने की आशंका के कारण यह मामला केवल शहर की सुंदरता तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यातायात और सड़क सुरक्षा से भी जुड़ जाता है।

एमजी रोड पर भी गणेश चतुर्थी और राजनीतिक बधाई संदेशों से जुड़े पोस्टर-बैनर बड़ी संख्या में लगे होने की बात सामने आई है। एक व्यावसायिक भवन पर बड़े आकार का बधाई बैनर लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे बड़े विज्ञापन तेज हवा या बारिश में क्षतिग्रस्त होकर सड़क पर गिरें तो राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा हो सकती है। इसी वजह से यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि नो फ्लैक्स जोन घोषित करने के बाद नियमों के उल्लंघन पर कितनी तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

नगर निगम की कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निगम की कार्रवाई में भेदभाव किया जाता है और छोटे व्यापारियों के पोस्टर पर कार्रवाई होने के बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर लगे फ्लैक्स पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने लटकते पोस्टर-बैनरों से सड़क सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई है। आकाश तिवारी इससे पहले भी राजधानी में नगर निगम की कार्यप्रणाली से जुड़े दूसरे मुद्दों पर सवाल उठा चुके हैं।

वहीं नगर निगम की ओर से कहा गया है कि अवैध फ्लैक्स और पोस्टर के खिलाफ कार्रवाई जारी है और संबंधित लोगों तक पहुंचकर कार्रवाई की जा रही है। निगम की ओर से फ्लैक्स और पोस्टर प्रिंटर्स की बैठक आयोजित करने तथा फ्लैक्स पर प्रिंटर समेत जरूरी जानकारी अनिवार्य करने की बात भी कही गई है।

रायपुर में नो फ्लैक्स जोन के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब निगरानी और कार्रवाई दोनों को प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। निर्धारित स्थानों के बाहर लगाए गए पोस्टर-बैनर हटाने के साथ यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि नियम तोड़ने वालों पर कितनी कार्रवाई हुई और कितने फ्लैक्स हटाए गए। इससे न केवल शहर की व्यवस्था और सुंदरता बेहतर होगी, बल्कि सड़क किनारे लगे बड़े और असुरक्षित विज्ञापन माध्यमों से पैदा होने वाले संभावित जोखिम को भी कम किया जा सकेगा।