MP प्रोबेशन पीरियड मामला: हाईकोर्ट के 100% वेतन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार, स्टे की मांग

मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड में 70%, 80% और 90% वेतन देने के नियम को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को रद्द कर प्रोबेशन अवधि में 100% वेतन देने का निर्देश दिया था। अब राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है।

Sep 15, 2026 - 13:01
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MP प्रोबेशन पीरियड मामला: हाईकोर्ट के 100% वेतन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार, स्टे की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़े प्रोबेशन पीरियड यानी परीक्षा अवधि में कम वेतन देने के नियम को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इस मामले में अब आगे की सुनवाई के दौरान यह तय होना है कि हाईकोर्ट के 100 प्रतिशत वेतन देने के निर्देश पर रोक लगती है या कर्मचारियों को मिली राहत जारी रहती है।

दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से नए नियुक्त सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रोबेशन पीरियड के दौरान चरणबद्ध तरीके से वेतन देने की व्यवस्था लागू थी। इसके तहत कर्मचारी को प्रोबेशन के पहले वर्ष में निर्धारित वेतन का 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन दिए जाने का प्रावधान था। परीक्षा अवधि पूरी होने के बाद कर्मचारी को नियमित रूप से पूरा वेतन मिलने की व्यवस्था थी। इसी नियम को लेकर कर्मचारियों की ओर से आपत्ति जताई गई थी और मामला न्यायालय तक पहुंचा।

जबलपुर हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था पर सुनवाई करते हुए प्रोबेशन अवधि में कम वेतन देने वाले नियम को रद्द कर दिया था। अदालत ने नए नियुक्त कर्मचारियों को परीक्षा अवधि के दौरान भी 100 प्रतिशत वेतन देने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के इस फैसले से उन सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बनी, जो नियुक्ति के बाद प्रोबेशन पीरियड में कम वेतन प्राप्त कर रहे थे। हालांकि, राज्य सरकार ने इस फैसले को वित्तीय और प्रशासनिक दृष्टि से चुनौती देने का फैसला किया।

सरकार का मुख्य तर्क है कि प्रोबेशन पीरियड में कर्मचारियों को पूरा वेतन देने से राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि हाईकोर्ट के फैसले पर रोक क्यों लगाई जानी चाहिए। इसके जवाब में राज्य सरकार ने अपना पक्ष दाखिल कर दिया है।

अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल राज्य सरकार के जवाब पर आगे सुनवाई होगी। इस दौरान शीर्ष अदालत सरकार की दलीलों और हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार कर सकती है। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाता है तो प्रोबेशन पीरियड में 100 प्रतिशत वेतन देने के निर्देश पर फिलहाल रोक लग सकती है। वहीं, यदि स्टे नहीं मिलता है तो हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक कर्मचारियों को परीक्षा अवधि से ही पूर्ण वेतन देने की व्यवस्था लागू रहने की संभावना होगी।

यह मामला मध्य प्रदेश के बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और भविष्य में होने वाली नई नियुक्तियों से जुड़ा माना जा रहा है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आगामी रुख पर कर्मचारियों और राज्य सरकार दोनों की नजर बनी हुई है। मामले में अंतिम निर्णय आने तक प्रोबेशन अवधि के वेतन से संबंधित व्यवस्था को लेकर स्थिति अदालत के आदेशों पर निर्भर रहेगी।