कार्यक्रम में डीडीएम भानु सिंह, टीएसएम महेश तोषनीवाल, ज्ञानदीप स्कूल के प्राचार्य एनके सोनी, तरुण डहरिया और शिक्षक आशीष बोबडे मौजूद रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई गणेश प्रतिमाओं का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों से प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया और इस आयोजन के उद्देश्य के बारे में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने प्राकृतिक मिट्टी से प्रतिमाएं बनाने और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को लेकर अपनी बात रखी।
आयोजन के दौरान गणेश प्रतिमा निर्माण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपने हाथों से मिट्टी को आकार देकर गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रतिमा बनाने वाले विद्यार्थियों का चयन प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए किया गया। चयनित विद्यार्थियों को मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अलावा प्रतियोगिता में शामिल सभी बच्चों को भी प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना और उन्हें प्रकृति के अनुकूल गणेश उत्सव के लिए प्रेरित करना था। प्राकृतिक मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं बनाने के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि त्योहारों के दौरान ऐसी प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिनके विसर्जन के बाद जलस्रोतों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव कम हो।
कार्यक्रम में मिट्टी और प्राकृतिक सामग्री से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने पर जोर दिया गया। आयोजकों ने पीओपी, सेरेमिक और विभिन्न रासायनिक पदार्थों से निर्मित प्रतिमाओं के विकल्प के तौर पर प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा देने का संदेश दिया। इस पहल का उद्देश्य केवल प्रतिमा निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझाने और दैनिक जीवन में प्रकृति संरक्षण की भावना विकसित करने से भी जुड़ा रहा।
बच्चों के हाथों से गणेश प्रतिमाएं तैयार कराने की पहल ने कला और पर्यावरण जागरूकता को एक साथ जोड़ने का काम किया। इससे विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिला और साथ ही उन्हें यह समझने का मौका मिला कि धार्मिक आयोजनों में पर्यावरण हितैषी विकल्पों को अपनाया जा सकता है। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और शिक्षकों ने बच्चों के प्रयासों को सराहा और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में कम उम्र से ही प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है। अमरवाड़ा में आयोजित इस कार्यक्रम ने गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच मिट्टी की प्रतिमाओं और पर्यावरण अनुकूल उत्सव को लेकर जागरूकता का संदेश दिया।