जिनपिंग-मोदी मुलाकात के बाद LAC पर चीन की सेना में कमी? रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में PLA तैनाती घटने का जिक्र

रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत-चीन उत्तरी सीमा के सामने चीनी PLA की तैनाती में 2025 के दौरान उल्लेखनीय कमी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2024 के डिसएंगेजमेंट के बाद सीमा पर डि-एस्केलेशन की दिशा में प्रगति हुई है, हालांकि पूरी तरह डि-इंडक्शन अभी बाकी है। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच गतिरोध का भी जिक्र है।

Sep 14, 2026 - 14:16
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जिनपिंग-मोदी मुलाकात के बाद LAC पर चीन की सेना में कमी? रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में PLA तैनाती घटने का जिक्र

UNITED NEWS OF ASIA. भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर चीनी सेना की तैनाती को लेकर रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में उत्तरी सीमा के सामने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की तैनाती में उल्लेखनीय कमी देखी गई। यह रिपोर्ट ऐसे समय चर्चा में है, जब ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर भारत-चीन संबंधों में संभावित सुधार की चर्चा हो रही है। हालांकि रिपोर्ट में सैनिकों की कमी को सीधे तौर पर इस मुलाकात का परिणाम नहीं बताया गया है।

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में भारत और चीन के बीच हुई डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया के बाद सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में कुछ प्रगति हुई है। रिपोर्ट के आधार पर यह संकेत मिलता है कि चीन की ओर से डि-एस्केलेशन यानी सीमा पर सैनिकों की तैनाती कम करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ने की स्थिति बनी है। हालांकि भारत और चीन के बीच पूरी तरह डि-इंडक्शन की प्रक्रिया अभी बाकी है। डि-इंडक्शन का अर्थ अग्रिम क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे निर्धारित बैरक या अन्य स्थानों पर वापस भेजना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-चीन सीमा से जुड़े राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर के संपर्कों का उत्तरी सीमा की स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। दोनों देशों के बीच वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन यानी WMCC और सीमा मामलों को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता का भी उल्लेख किया गया है। इन संवाद प्रक्रियाओं के जरिए सीमा पर स्थिरता बनाए रखने की कोशिशों का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की SCO समिट के दौरान तियानजिन यात्रा को भी भारत-चीन संबंधों और सीमा पर शांति से जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में रिपोर्ट में शामिल किया गया है।

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि LAC के अलग-अलग सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती मजबूत स्थिति में है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक सीमा पर भारतीय सेना की निगरानी और सैन्य तैयारियों को महत्वपूर्ण माना गया है।

हालांकि चीन की अग्रिम तैनाती में कमी के बावजूद चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार PLA के करीब डेढ़ लाख सैनिकों की क्षमता वाली कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड जैसी सैन्य संरचनाएं सीमा के आसपास मौजूद प्रशिक्षण क्षेत्रों में तैनात हैं। ऐसी स्थिति में आवश्यकता पड़ने पर सैनिकों को अपेक्षाकृत तेजी से सीमा क्षेत्र में भेजा जा सकता है। यही वजह है कि भारतीय पक्ष की ओर से केवल डि-एस्केलेशन ही नहीं, बल्कि डि-इंडक्शन पर भी जोर दिया जा रहा है।

अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में भारत और चीन के बीच गतिरोध का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। पिछले एक महीने से जारी फेस-ऑफ को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर पर दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार गलवान घाटी की 2020 की झड़प के बाद LAC पर सैन्य स्थिति में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में चीनी सैनिकों की तैनाती में कमी को सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन सीमा पर पूर्ण सामान्य स्थिति बहाल होने के लिए डि-इंडक्शन और अन्य लंबित मुद्दों पर प्रगति जरूरी होगी।