जीतू पटवारी ने कहा कि शहर में यातायात व्यवस्था लगातार खराब होती जा रही है। प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रहती है और खराब सड़कों के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ट्रैफिक जाम से जुड़ी घटनाओं और लोगों की मौतों का मुद्दा उठाते हुए व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। पटवारी ने सवाल किया कि यदि शहर में यातायात व्यवस्था के कारण लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया। उनके मुताबिक लंबे समय से चल रहे कथित संरक्षण का असर शहर की प्लानिंग और आम लोगों की सुविधाओं पर पड़ रहा है। हालांकि ये आरोप राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आए हैं। बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया है, इसकी जानकारी इस बयान में सामने नहीं आई है।
पटवारी ने इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि शहर में मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित है और इसके कारण भविष्य के विकास को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बढ़ती आबादी, नए इलाकों के विस्तार, सड़क नेटवर्क और यातायात दबाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सुनियोजित विकास जरूरी है। कांग्रेस का कहना है कि मास्टर प्लान को जल्द लागू किया जाना चाहिए, ताकि शहर की मौजूदा समस्याओं के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले तीन महीने के भीतर इंदौर का मास्टर प्लान लागू नहीं किया गया और यातायात तथा सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी। पटवारी के अनुसार वह 50 हजार इंदौरियों के साथ भोपाल पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर शहर की समस्याओं को सामने रखेंगे। इस चेतावनी के बाद मास्टर प्लान और ट्रैफिक व्यवस्था का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
पटवारी ने ‘उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन’ नामकरण पर भी आपत्ति जताई और इसे अनुचित बताया। उन्होंने सरकार से शहर के विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय जरूरतों और नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता देने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि केवल घोषणाओं के बजाय जमीन पर ठोस काम दिखाई देना चाहिए।
अब आने वाले तीन महीनों में सरकार और प्रशासन की ओर से इंदौर के मास्टर प्लान, सड़क और यातायात व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। यदि कांग्रेस अपनी घोषित रणनीति के अनुसार आंदोलन करती है तो यह मुद्दा इंदौर से निकलकर राजधानी भोपाल तक राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।