वायरल तस्वीर में पुतिन के साथ नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो दिखाई देते हैं। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को भी तस्वीर में शामिल किया गया है। तस्वीर में इतने प्रभावशाली नेताओं को एक साथ दिखाए जाने के कारण इसे लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस AI तस्वीर को दक्षिण अफ्रीका स्थित रूसी दूतावास की ओर से जारी किए जाने की बात कही गई है। तस्वीर वास्तविक नहीं होने के बावजूद इसके राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे रूस की ओर से अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए संदेश के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, इस तस्वीर को किसी औपचारिक कूटनीतिक बयान या BRICS की आधिकारिक घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
BRICS Summit ऐसे समय में आयोजित हुआ जब समूह के कई सदस्य देश अलग-अलग भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। रूस और ईरान पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के प्रतिबंध हैं, जबकि भारत और चीन के साथ भी अमेरिका के व्यापार और टैरिफ से जुड़े मतभेद सामने आते रहे हैं। ऐसे माहौल में BRICS के मंच पर विभिन्न देशों के नेताओं की मौजूदगी समूह के भीतर आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण मानी जाती है।
BRICS के बढ़ते विस्तार के साथ समूह में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका भी बढ़ी है। संगठन आर्थिक सहयोग, व्यापार और विकास से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच संवाद का मंच उपलब्ध कराता है। रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के पश्चिमी देशों के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच BRICS की बैठकों पर वैश्विक स्तर पर विशेष नजर रहती है।
नई दिल्ली में हुए सम्मेलन के दौरान साझा घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने की बात भी सामने आई। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले की सामूहिक निंदा कराने में सफलता हासिल की। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS की भूमिका पर जोर देते हुए इसे वैश्विक समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करने वाला मंच बताया। सम्मेलन से अलग भारत की कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी हुई।
ऐसे में पुतिन की बताई जा रही ‘Superpower Selfie’ भले ही AI से तैयार तस्वीर हो, लेकिन इसने BRICS के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और सदस्य देशों के बीच सहयोग को लेकर नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। तस्वीर के जरिए सोशल मीडिया पर जिस तरह की राजनीतिक व्याख्याएं की जा रही हैं, उन्हें वास्तविक कूटनीतिक घटनाओं से अलग समझना जरूरी है। AI-generated तस्वीर होने के कारण इसे किसी वास्तविक बैठक या आधिकारिक फोटो का प्रमाण नहीं माना जा सकता।