Crude Oil Price Today: कच्चे तेल में जोरदार उछाल, ब्रेंट 100 डॉलर के करीब, ईरान-अमेरिका तनाव से भारत की बढ़ी चिंता
9 सितंबर 2026 को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब और WTI क्रूड 94 डॉलर के पार पहुंचने से भारत के आयात बिल, पेट्रोल-डीजल कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ने की चिंता सामने आई है।
UNITED NEWS OF ASIA. ग्लोबल मार्केट में 9 सितंबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा ग्लोबल ऑयल सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच Brent Crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। वहीं WTI Crude भी 94 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करता नजर आया। तेल की कीमतों में इस तेजी ने उन देशों की चिंता बढ़ा दी है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करते हैं। भारत भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची रहने पर घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को तेल की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजहों में शामिल किया जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सेना ने ईरान के तेल टैंकरों पर कार्रवाई की है, जबकि ईरान की ओर से एक अमेरिकी ड्रोन को अपने कब्जे में लेने का दावा किया गया है। इन घटनाओं से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
इसी बीच अमेरिका ने ईरान से जुड़ी 36 संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इन संस्थाओं में विदेशी कार्गो सेवाएं देने वाली कंपनियों और एयरलाइंस के शामिल होने की बात सामने आई है। अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बढ़ाना और उसके व्यापारिक नेटवर्क को कमजोर करना है। प्रतिबंधों की घोषणा के बाद ईरान की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कदमों की आलोचना की है।
अमेरिका ने उन देशों को भी चेतावनी दी है, जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से बाहर किए जाने जैसे कदमों का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह के बयानों से ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। बाजार में निवेशक अब अमेरिका-ईरान संबंधों और मध्य पूर्व की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी के बीच Goldman Sachs का 120 डॉलर प्रति बैरल वाला संभावित अनुमान भी चर्चा में है। बैंकिंग और निवेश क्षेत्र की इस संस्था का आकलन रहा है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबा खिंचता है और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में सप्लाई क्राइसिस बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। हालांकि यह एक संभावित अनुमान है और इसे मौजूदा कीमत का निश्चित पूर्वानुमान नहीं माना जा सकता।
भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और इसके लिए अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है। यदि कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ने की संभावना भी बढ़ सकती है।
महंगे कच्चे तेल का प्रभाव केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने से वस्तुओं की लागत पर असर पड़ सकता है और उत्पादन क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसके चलते महंगाई की स्थिति प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में Brent Crude, WTI Crude, अमेरिका-ईरान तनाव और Strait of Hormuz की स्थिति वैश्विक बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। भारत में भी आम लोगों, उद्योगों और निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और उससे जुड़े घटनाक्रम पर बनी रहेगी।