अमेरिकी सेना के अनुसार ओमान की खाड़ी में चार तेल टैंकरों को कार्रवाई का निशाना बनाया गया। इनमें M/T Kaviz, M/T Charminar, M/T Horizon 1 और M/T Riesco शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा M/T Derya को खार्ग द्वीप के पास निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। CENTCOM का दावा है कि इन तेल टैंकरों का इस्तेमाल ईरान द्वारा अरबों डॉलर के एक गुप्त नेटवर्क के हिस्से के रूप में किया जाता था। अमेरिकी पक्ष के अनुसार इस नेटवर्क से प्राप्त धन का इस्तेमाल IRGC और उसके क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों को आर्थिक सहायता पहुंचाने में किया जाता रहा है।
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ घंटे बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कदम उठाया गया। रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने की दिशा में करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन ने दावा किया कि इनमें से 18 मिसाइलों को आसमान में ही रोक दिया गया। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है तथा अमेरिका के साथ ईरान के सीधे टकराव की आशंका को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
अमेरिकी हमले के बाद ईरान के IRGC की ओर से कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के आसपास मौजूद कुछ तेल टैंकरों को चेतावनी दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। ईरानी पक्ष ने कथित तौर पर ऐसे जहाजों के चालक दल को जहाज खाली करने के लिए कहा है। ईरान ने संकेत दिया है कि यदि इन जहाजों का संबंध अमेरिकी पक्ष से पाया जाता है तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। इससे खाड़ी क्षेत्र में समुद्री परिवहन और तेल आपूर्ति को लेकर भी तनाव बढ़ने की आशंका है।
अमेरिका की ओर से ईरान को आगे की कार्रवाई को लेकर कड़ा संदेश दिया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कोलंबिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमला करने की कोशिश का जवाब दिया जाएगा। उनका बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यदि अमेरिकी सैन्य ठिकानों या जहाजों को फिर से निशाना बनाया गया तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई जारी रख सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों की आवाजाही, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर किसी भी सैन्य टकराव का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में किसी भी नए घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
फिलहाल अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश, पांच ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई और इसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर मिसाइल हमले ने अमेरिका-ईरान तनाव को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियां इस क्षेत्र की सुरक्षा तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।