CJP आंदोलन की NIA जांच की मांग पर दिल्ली हाई कोर्ट करेगा सुनवाई, विदेशी फंडिंग के आरोपों की होगी पड़ताल

जंतर-मंतर पर जारी CJP आंदोलन के बीच विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई करेगा। याचिका में 20 जुलाई के संसद मार्च और आंदोलन की NIA से जांच की मांग की गई है। अदालत शुक्रवार को मामले की सुनवाई करेगी।

Jul 23, 2026 - 13:42
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CJP आंदोलन की NIA जांच की मांग पर दिल्ली हाई कोर्ट करेगा सुनवाई, विदेशी फंडिंग के आरोपों की होगी पड़ताल

UNITED NEWS OF ASIA. जंतर-मंतर पर जारी CJP आंदोलन के बीच विदेशी फंडिंग के आरोपों ने राजनीतिक और कानूनी बहस को नया मोड़ दे दिया है। आंदोलन और 20 जुलाई को हुए संसद मार्च की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई करने पर सहमति दे दी है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी, जिसमें अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों और जांच की मांग पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी।

याचिका सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने दायर की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ करेगी। याचिका में दावा किया गया है कि 20 जुलाई का संसद मार्च और प्रदर्शन एक सुनियोजित गतिविधि का हिस्सा था तथा इसमें विदेशी फंडिंग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच NIA से कराने की मांग की गई है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली में आम जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में यातायात व्यवस्था बाधित रही, सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों को आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि विदेशी फंडिंग या किसी बाहरी नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उसकी गहन जांच आवश्यक होगी।

इधर, जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने लगातार दूसरे दिन भी सुरक्षा कारणों से राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों की एंट्री और एग्जिट सेवाएं बंद रखीं। हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रही, लेकिन यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश या बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।

इस बीच पेपर लीक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों और युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे और संबंधित अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, जबकि आंदोलन से जुड़े पक्ष लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। अब दिल्ली हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि अदालत का रुख इस मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।