खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SRCC पहुंचे थे। उनके मुताबिक, यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य को लेकर संवाद का महत्वपूर्ण अवसर था, लेकिन युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय प्रधानमंत्री का भाषण राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रहा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों और उदाहरणों को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि कभी ‘नाराज फूफा’ तो कभी ‘दिमागी नक्सल’ जैसे जुमले सामने आते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों में बदलाव नहीं दिखाई देता।
‘युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है’
खड़गे ने प्रधानमंत्री के ‘रिपोर्ट कार्ड’ वाले संदर्भ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाया है, लेकिन देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है।
खड़गे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को आउटरीच की जरूरत तब पड़ती है, जब वह लोगों की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SRCC के 100वें स्थापना दिवस समारोह में छात्रों के बीच करीब 48 मिनट तक संबोधन किया।
PM मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ का किया जिक्र
SRCC में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर ‘इसकी क्या जरूरत है’ कहने वाले लोग ‘नाराज फूफा’ की तरह हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों का उदाहरण देते हुए बुलेट ट्रेन, UPI और नई संसद जैसी परियोजनाओं पर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देश की आर्थिक स्थिति और 2013 के आसपास के हालात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
खड़गे ने उठाया सरकार की नीतियों का मुद्दा
खड़गे ने प्रधानमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की नीतियों को लेकर सवाल खड़े किए। कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि देश के युवा रोजगार, शिक्षा, अवसर और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जवाब चाहते हैं।
इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के SRCC संबोधन और खड़गे की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को तेज कर दिया है। अब दोनों दलों के बीच युवाओं, शिक्षा, रोजगार और सरकार के कामकाज को लेकर सियासी बहस और बढ़ने के आसार हैं।