मानपुर के नवागांव कन्या छात्रावास में बड़ी लापरवाही, अधीक्षक के गायब होने से 38 बच्चियां घर लौटने को मजबूर

मोहला-मानपुर-चौकी जिले के मानपुर क्षेत्र के नवागांव स्थित शासकीय प्री कन्या छात्रावास में अधीक्षक के बिना सूचना अनुपस्थित रहने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अधीक्षक के छात्रावास से चले जाने के बाद शाम को बच्चियों के लिए भोजन की व्यवस्था नहीं हो सकी। छात्रावास में दर्ज 40 बालिकाओं में से 38 बच्चियां अपने घर लौट गईं, जबकि दो बच्चियां छात्रावास में रह गईं। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले सामने आई इस घटना को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और जांच की मांग उठ रही है।

Sep 6, 2026 - 20:15
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मानपुर के नवागांव कन्या छात्रावास में बड़ी लापरवाही, अधीक्षक के गायब होने से 38 बच्चियां घर लौटने को मजबूर

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख़, मोहला-मानपुर-चौकी। मानपुर क्षेत्र के नवागांव स्थित शासकीय प्री कन्या छात्रावास में व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि रविवार को छात्रावास की अधीक्षक बिना पूर्व सूचना के छात्रावास से चली गईं। अधीक्षक की गैरमौजूदगी में छात्रावास में भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति बिगड़ गई। शाम के समय बच्चियों के लिए भोजन नहीं बन पाने की जानकारी सामने आने के बाद छात्रावास में रह रही बालिकाओं और उनके परिजनों में चिंता बढ़ गई।

बताया जा रहा है कि नवागांव के इस छात्रावास में कुल 40 बालिकाएं दर्ज हैं। अधीक्षक के अचानक अनुपस्थित होने और भोजन की व्यवस्था प्रभावित होने के बाद 38 बच्चियां अपने-अपने घर लौट गईं। मौके पर केवल दो बच्चियां ही रह गईं। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्र में संचालित कन्या छात्रावास में छात्राओं की सुरक्षा, भोजन और रहने की व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का जिले में दौरा प्रस्तावित था। मंत्री के आगमन से ठीक पहले छात्रावास में इस तरह की स्थिति सामने आने से शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की ओर से दूरस्थ क्षेत्रों में छात्राओं को बेहतर शिक्षा के साथ सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर यदि जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी बिना सूचना अनुपस्थित रहते हैं और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तो इसका सीधा असर छात्राओं पर पड़ता है।

ग्रामीणों ने छात्रावास की व्यवस्थाओं की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रावास में रहने वाली छात्राएं अपने परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और भोजन की जिम्मेदारी छात्रावास प्रबंधन की होती है। अधीक्षक की अनुपस्थिति में किसी वैकल्पिक जिम्मेदार कर्मचारी की व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि छात्राओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि छात्रावास में 40 बालिकाएं रह रही थीं, तो अधीक्षक के अनुपस्थित होने की स्थिति में भोजन, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए विभाग की ओर से क्या वैकल्पिक व्यवस्था निर्धारित थी। यदि ऐसी कोई व्यवस्था थी तो वह मौके पर क्यों प्रभावी नहीं हो सकी, इसकी जांच की जरूरत बताई जा रही है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रावास की व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। अब शिक्षा मंत्री के जिले में पहुंचने के बाद इस मामले में क्या संज्ञान लिया जाता है और विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर है। छात्रावास में रहने वाली बालिकाओं की सुरक्षा, भोजन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी तय करना अब प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।