झीरम का फैसला आधा-अधूरा न्याय, साजिश का सच अब भी सामने नहीं आया: कांग्रेस

झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे आधा-अधूरा न्याय बताते हुए जांच की दिशा और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि एनआईए ने राजनीतिक षडयंत्र के पहलू की पर्याप्त जांच नहीं की और कई प्रमुख नक्सली नेताओं से पूछताछ नहीं की गई। पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा, यात्रा मार्ग में बदलाव, तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ और एसआईटी जांच को लेकर भी कई सवाल उठाए।

Sep 6, 2026 - 19:36
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झीरम का फैसला आधा-अधूरा न्याय, साजिश का सच अब भी सामने नहीं आया: कांग्रेस

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे आधा-अधूरा न्याय बताते हुए जांच की प्रक्रिया और घटना के पीछे कथित साजिश को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा गया कि अदालत के फैसले का सम्मान किया जाता है, लेकिन न्याय तभी पूर्ण माना जा सकता है जब झीरम हमले की पूरी साजिश और इसके पीछे मौजूद लोगों की भूमिका सामने आए। कांग्रेस का कहना है कि एनआईए ने जांच के दौरान घटना के राजनीतिक षडयंत्र वाले पहलू पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही और जिन आरोपियों को दोषी ठहराया गया, वे छोटे स्तर के नक्सली थे। उनका कहना है कि इतनी बड़ी घटना केवल छोटे कैडरों के स्तर पर संभव नहीं हो सकती थी और इसके पीछे बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी। पत्रकार वार्ता में यह सवाल उठाया गया कि एनआईए की शुरुआती एफआईआर में जिन प्रमुख नक्सली नेताओं के नाम शामिल थे, बाद की चार्जशीट में उनके नाम क्यों नहीं रहे।

कांग्रेस ने बताया कि शुरुआती जांच में गणपति उर्फ मुपल्ला लक्ष्मण राव और रमन्ना सहित कई लोगों के नाम सामने आए थे। वर्ष 2014 में इन लोगों सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने का उल्लेख करते हुए कांग्रेस ने सवाल किया कि बाद में इन नामों को चार्जशीट से क्यों हटा दिया गया। इसी तरह देवा उर्फ बारसे सुक्का सहित अन्य नक्सलियों के नाम जांच के दौरान सामने आने के बावजूद उनसे पूछताछ नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए।

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने झीरम हमले से जुड़े कई अन्य बिंदुओं पर भी जांच एजेंसी से जवाब मांगा। इसमें सबसे प्रमुख सवाल यह रहा कि कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी और यात्रा का मार्ग किसके निर्देश पर बदला गया था। हमले की योजना किसने बनाई और घटना के दौरान घायल होकर जीवित बचे लोगों तथा प्रत्यक्षदर्शियों से कितनी विस्तृत पूछताछ की गई, इस पर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने दावा किया कि कई प्रभावित लोगों ने शपथ पत्र के साथ जांच एजेंसियों के समक्ष अपनी बात रखी, लेकिन उनके बयानों को जांच में शामिल नहीं किया गया।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य सामान घटनास्थल पर लंबे समय तक बिखरे रहे तथा कई जरूरी साक्ष्यों को लेकर भी जांच पर सवाल खड़े होते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गठित एसआईटी को जांच से दूर रखने और तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी तथा एडीजी नक्सल से पूछताछ को लेकर भी कांग्रेस ने स्पष्टीकरण मांगा।

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने आत्मसमर्पण कर चुके कई प्रमुख नक्सलियों से झीरम मामले में पूछताछ किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने कहा कि जिन लोगों के नाम कभी जांच में सामने आए या जिन्हें वांछित बताया गया, उनमें से कई बाद में सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं। ऐसे लोगों से झीरम हत्याकांड को लेकर पूछताछ और उनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई, यह स्पष्ट होना चाहिए।

कांग्रेस ने भाजपा पर भी झीरम मामले की जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि झीरम की पूरी साजिश सामने आने से ही पीड़ित परिवारों को वास्तविक न्याय मिल सकेगा। कांग्रेस ने मांग की कि घटना से जुड़े सभी राजनीतिक, प्रशासनिक और नक्सली पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो तथा जिन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं, उनका तथ्यात्मक रूप से निराकरण किया जाए।