रक्षक पाठ्यक्रम को मिला अंतिम रूप, कॉलेजों में शुरू होगी बाल सुरक्षा की पढ़ाई

रायपुर में आयोजित विश्वविद्यालयीय बैठक में “रक्षक” पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया। इस पहल के तहत कॉलेज छात्रों को बाल अधिकारों और सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित किया जाएगा।

Apr 15, 2026 - 18:27
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रक्षक पाठ्यक्रम को मिला अंतिम रूप, कॉलेजों में शुरू होगी बाल सुरक्षा की पढ़ाई

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाल सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से महाविद्यालयीन छात्रों को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक बनाकर उन्हें समाज में बाल संरक्षण का प्रहरी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस संबंध में रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा विश्वविद्यालयीय परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का आयोजन होटल बेबिलोन में हुआ, जिसमें राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। आयोग के सचिव प्रतीक खरे और डायरेक्टर संगीता बिंद ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “रक्षक” पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सामाजिक अभियान है।

उन्होंने कहा कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से युवाओं को बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा, जिससे समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। उनका मानना है कि यदि छात्र इस विषय में प्रशिक्षित होंगे, तो वे अपने आसपास होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकेंगे।

इस पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए पहले ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की उपस्थिति में एमओयू किया जा चुका है। यह कदम राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में इस पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

बैठक में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा) सहित कई निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने पाठ्यक्रम की संरचना, उपयोगिता और व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों को अंतिम रूप देना था, ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे लागू किया जा सके। विशेषज्ञों ने सुझाव देते हुए कहा कि यह पाठ्यक्रम छात्रों के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक जिम्मेदारी को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सभी विश्वविद्यालयों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ेगी, बल्कि समाज में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर एक सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।