डोंगरगढ़ में मुस्लिम समाज की अनोखी पहल, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में मुस्लिम समाज ने सांप्रदायिक सौहार्द और गौ संरक्षण का संदेश देते हुए बाइक रैली निकाली। जामा मस्जिद से एसडीएम कार्यालय तक पहुंचे समाज के लोगों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और देशभर में बूचड़खानों को बंद करने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. नेमिश अग्रवाल l राजनांदगांव जिले की धर्मनगरी डोंगरगढ़ में सांप्रदायिक सौहार्द और गौ संरक्षण को लेकर एक अनोखी पहल देखने को मिली। ईद-उल-अजहा के बाद शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के उपरांत मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों ने एकजुट होकर गाय के संरक्षण के समर्थन में बाइक रैली निकाली। रैली जामा मस्जिद से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंची, जहां राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
मुस्लिम समाज के लोगों ने ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और देशभर में संचालित बूचड़खानों को बंद करने की मांग की। इस दौरान बड़ी संख्या में युवक, बुजुर्ग और समाज के प्रमुख लोग शामिल हुए। रैली में शामिल लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर गौ संरक्षण के समर्थन में नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गाय की रक्षा करना किसी एक धर्म या समुदाय की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। समाज के लोगों ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य समाज में भाईचारे, प्रेम और एकता का संदेश देना है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए गौ संरक्षण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलने से उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा सकेंगे। साथ ही अवैध पशु वध पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
रैली के दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। ज्ञापन में देशभर में संचालित बूचड़खानों को बंद करने की मांग करते हुए कहा गया कि इससे पशु संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।
इस अनोखी पहल की पूरे शहर में चर्चा रही। विभिन्न वर्गों के लोगों ने इसे सामाजिक सौहार्द और एकता का प्रतीक बताया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे प्रयास समाज में आपसी विश्वास और सद्भाव को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
डोंगरगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि विभिन्न समुदाय सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुट होकर सकारात्मक संदेश दे सकते हैं। मुस्लिम समाज की इस पहल ने न केवल गौ संरक्षण के मुद्दे को सामने रखा, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी संदेश दिया। यही कारण है कि यह आयोजन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।