विकसित भारत जी राम जी योजना से बदली किसान की तकदीर, केंद्रीय टीम ने आजीविका डबरी मॉडल की सराहना

कबीरधाम जिले के ग्राम पोड़ी में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत निर्मित आजीविका डबरी ने किसान रामभजन की आय और जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की टीम ने निरीक्षण के दौरान इस मॉडल को जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए सराहा।

Jul 15, 2026 - 18:23
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विकसित भारत जी राम जी योजना से बदली किसान की तकदीर, केंद्रीय टीम ने आजीविका डबरी मॉडल की सराहना

UNITED NEWS OF ASIA. कबीरधाम जिले में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत बनाए गए आजीविका डबरी मॉडल ने ग्रामीण आजीविका और जल संरक्षण की दिशा में नई मिसाल पेश की है। जनपद पंचायत बोड़ला के ग्राम पंचायत पोड़ी निवासी किसान रामभजन के जीवन में इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाते हुए उनकी आय में कई गुना वृद्धि का रास्ता खोल दिया है। हाल ही में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की केंद्रीय टीम ने स्थल निरीक्षण कर इस कार्य की सराहना की।

रामभजन के पास लगभग 50 डिसमिल कृषि भूमि थी, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण वे केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थे। इससे उन्हें धान और पारंपरिक फसलों से सालाना लगभग 8 से 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आय ही मिल पाती थी। योजना के तहत उन्हें 1.80 लाख रुपये की लागत से आजीविका डबरी निर्माण की स्वीकृति मिली। पंचायत स्तर पर ग्राम रोजगार सहायक और तकनीकी सहायक ने उन्हें योजना की जानकारी देकर इसके लाभ बताए, जिसके बाद उनकी भूमि पर डबरी का निर्माण कराया गया।

डबरी बनने के बाद रामभजन की खेती पूरी तरह बदल गई। अब डबरी में वर्षभर पानी उपलब्ध रहने से मत्स्य पालन, मेड़ों पर मौसमी सब्जियों और फलदार पौधों की खेती शुरू हो गई है। इससे उनकी वार्षिक अतिरिक्त आय बढ़कर लगभग 60 से 70 हजार रुपये होने की संभावना है। यह मॉडल जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का सफल उदाहरण बन गया है।

इस कार्य का निरीक्षण भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव पी.के. शर्मा, अपर सचिव राहुल श्रीवास्तव तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि डबरी निर्माण में 1 लाख 66 हजार रुपये मजदूरी के रूप में भुगतान किया गया तथा कुल 697 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। इससे हितग्राही परिवार के साथ अन्य ग्रामीणों को भी रोजगार मिला।

अधिकारियों ने बताया कि डबरी से आसपास लगभग एक एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा, भूजल स्तर में सुधार आएगा तथा हैंडपंपों के रिचार्ज में भी मदद मिलेगी। केंद्रीय टीम ने इस कार्य को ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और आजीविका सृजन का उत्कृष्ट मॉडल बताते हुए ऐसे कार्यों को बड़े स्तर पर लागू करने की आवश्यकता बताई।

जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अब तक 253 आजीविका डबरियों का निर्माण किया जा चुका है। इनसे लगभग 1.85 लाख मानव दिवस का रोजगार मिला और ग्रामीणों को 3.68 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी का भुगतान हुआ। इसके अलावा 25 "नवा तरिया" का निर्माण भी किया गया है, जिनसे 1.03 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है। इन योजनाओं के माध्यम से हजारों घन मीटर जल संग्रहण, सिंचाई सुविधा का विस्तार, भूजल संरक्षण और मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि इस तरह के मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।